ACTION AGAINST SCHOOLS RUNNING WITHOUT AUTHORITY Hold survey before taking action: HC


Chandigarh, May 21
The Punjab and Haryana High Court had made it clear that directions have been issued to Haryana for carrying out a survey before initiating action against schools running without authority. In the case of violation of the directions, the Financial Secretary-cum-Principal Secretary, Education Department, could be approached.

The assertion by a Division Bench of Acting Chief Justice Jasbir Singh and Justice Rakesh Kumar Jain came on a petition filed by Krishan Kumar against Haryana and other respondents.

He was seeking directions to the official respondents to take action against a school management for running an institute without obtaining permission under the Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009.

Taking up the matter, the Bench asserted: "For the purpose, the requisite direction has already been issued by this court in civil writ petition No 15225 of 2012 (Manoj Kumar Jaswal versus state of Haryana), wherein the government has been directed to conduct a survey; and if during the survey it is found that any school is being run without any authority, take action against that school".

The Bench added the present writ petition was as such being disposed of by giving liberty to the petitioner to approach the Financial Secretary-cum-Principal Secretary, Education Department, Haryana.

In Manoj Kumar's case, the petitioner had claimed schools were running in Faridabad without recognition. It is specifically stated that recognition was necessary under the provisions of Section 18 of the Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009. Taking up the matter, the Bench had directed the Financial Secretary-cum-Principal Secretary "to conduct a survey in the entire state to ensure that no school is established/allowed to function in violation of the provisions of Section 18 of the Act as well as the provisions of the Haryana School Education Act, 1995.

चौटाला को पेसमेकर लगवाने के लिए मिली जमानत


नई दिल्ली (ब्यूरो)। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला को पेसमेकर लगवाने के लिए छह सप्ताह की अंतरिम जमानत मिल गई है। जेल से छूटने के बाद 24 घंटे में चौटाला को गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती होना होगा। जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल ने कहा कि याची की मेडिकल रिपोर्ट को देखते हुए उसे मिली सजा को छह सप्ताह के लिए निलंबित किया जाता है। हाईकोर्ट ने चौटाला को पांच लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानतियों की शर्त पर अंतरिम जमानत दी है। कोर्ट ने चौटाला को उसका पासपोर्ट जिला अदालत में जमा करवाने के लिए भी कहा है। साथ ही अदालत की अनुमति के बिना चौटाला के एनसीआर से बाहर जाने पर भी पाबंदी है।
हरियाणा में जेबीटी भर्ती घोटाला मामले में ओमप्रकाश चौटाला (78) को दस साल कैद की सजा मिली थी। वहीं, कोर्ट ने सीबीआई की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें उसने जमानत के दौरान चौटाला पर प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करने पर रोक की मांग की थी।

Pgt bharti

स्कूल में पंद्रह महिला शिक्षकों की तैनाती

नरवाना (जींद)। शिक्षा विभाग ने जिले के एक गांव में नौंवी कक्षा की छात्रा से अध्यापक द्वारा दुराचार किए जाने के मामले से उपजे हालात पर नियंत्रण पाते हुए संबंधित राजकीय विद्यालय में स्टाफ को बदलते हुए पंद्रह महिला शिक्षकों की नियुक्ति कर दी है। इन नियुक्तियों के साथ ही अब सोमवार से स्कूल खुल जाएगा, जिसे ग्रामीणों ने दुराचार का मामला उजागर होने और अध्यापक की पिटाई के बाद से बंद कर रखा था। उनकी मांग थी कि स्कूल में महिला शिक्षिकों की नियुक्त की जाए, अन्यथा वे अपनी बच्चियों को स्कूल नहीं भेजेंगे।
शिक्षा विभाग द्वारा रविवार शाम को जींद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेजी गई सूची के मुताबिक, धरोदी से चांदकौर, सच्चाखेड़ा से प्रवीण रानी, दनौदा से दीपा, दनौदा कलां से सुदेश कुमारी, दबलैन से जयदेवी, धमतान साहिब से मनोज कुमारी, पीपलथा से हरदीप कौर, बेलरखा से बीरमती, दबलैन से राजेश कुमारी, दनौदा कलां से रीटा अग्रवाल व सरोज कुमारी, दनौदा खुर्द से बबीता को राजकीय विद्यालय में तैनात किया गया है। इसी परिसर में चल रहे राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला में बदौवाल से वीना भाटिया को मुख्याध्यापक, नरवाना से जेबीटी मनोज कुमारी व शीला देवी को तैनात करने आदेश भी जारी किए गए हैं।
तबादला करके भेजी गई सभी महिला टीचरों को सोमवार सुबह आठ बजे तक स्कूल पहुंचकर ज्वाइनिंग रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जींद को भेजने के लिए कहा गया है।
छात्रा से रेप की कड़ी निंदा
•छात्रा के रेप से गुस्साए ग्रामीणों की मांग मानी

सर्विस टैक्स जमा नहीं किया तो होंगे गिरफ्तार


नई दिल्ली। सर्विस टैक्स बकायेदारों के लिए बुरी खबर है। टैक्स जमा नहीं करने वालों की अब गिरफ्तारी की जा सकती है और उन्हें सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है। पिछले सप्ताह वित्त विधेयक 2013 के पास होने के साथ ही राजस्व विभाग के अधिकारी अब कलेक्शन किए गए सर्विस टैक्स का भुगतान नहीं करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकते हैं।
अभी तक अधिकारियों को सर्विस टैक्स चोरी के मामले में गिरफ्तारी का अधिकार नहीं था। इसके अलावा सर्विस टैक्स जमा न कराने वाली कंपनी के डायरेक्टर और मैनेजर को भी गिरफ्तार किया जा सकता है। साथ ही उन्हें 7 साल तक की सजा भी हो सकती है और एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यह पहली बार है जब सर्विस टैक्स नियमों में संशोधन कर सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क की तर्ज पर आपराधिक प्रक्रिया संहिता जोड़ी गई है। इस साल के वित्त बिल में जोड़ी गई धारा 91 के तहत जुटाए गए सर्विस टैक्स को जमा न करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार मिल गया है। हालांकि ऐसे मामलों में गिरफ्तारी केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधीक्षक के स्तर के अधिकारी ही कर सकेंगे। यह बिल 10 मई को पारित हुआ है। इसमें सर्विस टैक्स अदा न करने वाले और सरकार से रजिस्ट्रेशन नंबर लेने में विफल रहने वाले व्यक्ति या कंपनी पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है। एजेंसी
• वित्त बिल 2013 के पारित होने के साथ ही सरकार को मिली शक्ति
- 7 साल तक की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माने का भी प्रावधान

सर्विस टैक्स जमा नहीं किया तो होंगे गिरफ्तार


नई दिल्ली। सर्विस टैक्स बकायेदारों के लिए बुरी खबर है। टैक्स जमा नहीं करने वालों की अब गिरफ्तारी की जा सकती है और उन्हें सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है। पिछले सप्ताह वित्त विधेयक 2013 के पास होने के साथ ही राजस्व विभाग के अधिकारी अब कलेक्शन किए गए सर्विस टैक्स का भुगतान नहीं करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकते हैं।
अभी तक अधिकारियों को सर्विस टैक्स चोरी के मामले में गिरफ्तारी का अधिकार नहीं था। इसके अलावा सर्विस टैक्स जमा न कराने वाली कंपनी के डायरेक्टर और मैनेजर को भी गिरफ्तार किया जा सकता है। साथ ही उन्हें 7 साल तक की सजा भी हो सकती है और एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यह पहली बार है जब सर्विस टैक्स नियमों में संशोधन कर सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क की तर्ज पर आपराधिक प्रक्रिया संहिता जोड़ी गई है। इस साल के वित्त बिल में जोड़ी गई धारा 91 के तहत जुटाए गए सर्विस टैक्स को जमा न करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार मिल गया है। हालांकि ऐसे मामलों में गिरफ्तारी केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधीक्षक के स्तर के अधिकारी ही कर सकेंगे। यह बिल 10 मई को पारित हुआ है। इसमें सर्विस टैक्स अदा न करने वाले और सरकार से रजिस्ट्रेशन नंबर लेने में विफल रहने वाले व्यक्ति या कंपनी पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है। एजेंसी
• वित्त बिल 2013 के पारित होने के साथ ही सरकार को मिली शक्ति
- 7 साल तक की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माने का भी प्रावधान

रेडिएशन के नियम लागू करने को लेकर सख्त होगी सरकार अब मोबाइल हैंडसेट बताएगा कितना है खतरा


•धीरज कनोजिया
नई दिल्ली। मोबाइल हैंडसेट से निकलने वाली सेहत के लिए खतरनाक रेडिएशन किरणों को लेकर सरकार अब नींद से जागती दिख रही है। खासकर तय सीमा से अधिक रेडिएशन छोड़ने वाले हैंडसेटों पर सरकार सख्ती के मूड में है। सबसे पहले सरकार नियमों की अनदेखी कर रही कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए खुद को मजबूत बनाने की तैयारी में है।
इसके तहत दूरसंचार विभाग अपनी टेलीकॉम एनफोर्समेंट रिसॉर्स एंड मॉनीटरिंग (टीईआरएम यानी टर्म) इकाई को ताकत देने की कोशिश में है। ज्यादा रेडिएशन छोड़ने वाले हैंडसेटों की तलाशी और छापे मारने की ताकत देने की बात चल रही है। सरकार के निर्देश के तहत अब जल्द ही उपभोक्ता अपने नए हैंडसेट पर *#07# डायल कर रेडिएशन का स्तर जान सकेंगे। नोकिया और सैमसंग ने अपने नए मोबाइल हैंडसेट पर यह सेवा शुरू करने की बात कही है।
दूरसंचार विभाग उन आयातित मोबाइल हैंडसेटों पर रोक लगाने के लिए तैयार है, जिन पर रेडिएशन उत्सर्जन का स्तर नहीं दर्शाया गया है। विभाग का कहना है कि हैंडसेट की पैकेजिंग पर उत्सर्जन स्तर लिखा होना चाहिए। इसके अलावा दूरसंचार विभाग में यह बात काफी लंबे समय से चल रही है कि वे रेडिएशन स्तर का पता लगाने वाली इकाई टर्म को शक्तियां दें। इसके तहत वे बाजार या फिर कंपनियों के पास से तय सीमा का उल्लंघन करने वाले हैंडसेटों को जब्त करें। अभी तक टर्म के पास ऐसी ताकत नहीं है। इसके लिए टेलीग्राफ अधिनियम में संशोधन कराने की बात है।
दूसरी तरफ सरकार के निर्देश के अनुसार नए मोबाइल हैंडसेट में *#07# डायल कर रेडिएशन का स्तर पता लगाने का प्रस्ताव है। अभी *#07# डायल कर हैंडसेट का पहचान नंबर यानी आईएमईआई नंबर का पता लगाया जाता है। आईएमईआई नंबर से मोबाइल फोन ग्राहक का पता-ठिकाना खोजा जा सकता है।
विभाग के मुताबिक अब *#07# डायल कर अगर रेडिएशन तय स्तर से ज्यादा पाया जाता है तो इसकी शिकायत विभाग से की जा सकती है। नोकिया और सैमसंग अपने नए हैंडसेट में यह सुविधा देने की बात कर रहे हैं। अभी मोबाइल हैंडसेट कंपनियों का रेडिएशन यानी एसएआर स्तर 1.6 वाट प्रति किलोग्राम है। एसएआर यानी स्पेशीफिक एर्ब्सोपशन रेट वह दर होती है, जो बताती है कि आखिर हमारा शरीर कितनी मात्रा में रेडिएशन किरणों को ग्रहण कर सकता है। देश में पहले एक व्यक्ति के लिए रेडिएशन एसएआर स्तर छह मिनट के अंदर दो वाट प्रति किलोग्राम था, जिसे पिछले साल घटाकर 1.6 वाट प्रति किलोग्राम कर दिया गया।
•नए हैंडसेट में मिलेगी सुविधा, करना होगा *#07# डायल
•नोकिया और सैमसंग कंपनी ने की इसकी शुरुआत
•ज्यादा रेडिएशन वाले हैंडसेट की तलाशी और छापा मारने का अधिकार पाने की तैयारी

बीएड फर्जीवाड़े की चार्जशीट कोर्ट में पेश


शिमला। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बीएड प्रमाणपत्र फर्जीवाडे़ में सीबीआई जांच पूरी कर ली है। ब्यूरो ने संबंधित चार्जशीट को कोर्ट में पेश कर दिया है। अब कोर्ट में जिला कांगड़ा के ढलियारा कॉलेज निदेशक राजेश ठाकुर, बिहार निवासी डिलेश कुमार, फर्जी प्रमाणपत्र हासिल करने के आरोपी यशवीर, अनुज, वीरेंद्र सिंह और किरण कुमारी के खिलाफ मुकदमा शुरू हो गया है। सीबीआई के पुलिस अधीक्षक आर. उपासक ने इसकी पुष्टि की है।
हाईकोर्ट के आदेश पर ही यह मामला सीबीआई में दर्ज हुआ था। राजेश ठाकुर पर आरोप हैं कि उन्होंने बिहार निवासी डिलेश कुमार की मदद लेते हुए अपने संबंधियों के फर्जी प्रमाणपत्र बना लिए। ये दोनों लगभग तीन महीने तक न्यायिक हिरासत में भी रह चुके हैं। इस संबंध में सीबीआई ने आईपीसी की धारा 420, 467 और 461 के तहत जांच पूरी करने के बाद चार्जशीट तैयार की है, जिसके बाद अब इस पर चालान कोर्ट में पेश कर दिया गया है। सीबीआई के पुलिस अधीक्षक आर. उपासक ने बताया कि जांच में यह पाया गया है कि राजेश ठाकुर ने डिलेश कुमार की मदद लेकर अपने भाई यशवीर, अनुज, वीरेंद्र सिंह और किरण कुमारी के फर्जी प्रमाणपत्र बना लिए। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर कुछ ने नौकरी भी पा ली। ये प्रमाणपत्र मगध विश्वविद्यालय के बनाए गए हैं।
छानबीन में जब इनकी असलियत पता की गई, तो ये जाली पाए गए हैं। इनका वांछित रिकार्ड नहीं मिल पाया है। हाईकोर्ट से सीबीआई को मामला मिलने के बाद इसकी गंभीरता से जांच की गई। अब इसका चालान कोर्ट में पेश कर मुकदमा शुरू हो गया है।
•सीबीआई की जांच पूरी कॉलेज निदेशक समेत 6 पर मुकदमा शुरू
रिश्तेदारों के जाली प्रमाणपत्र बनाने के आरोप
हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई कर रही जांच
मगध विवि के नाम पर बनवाए जाली सर्टिफिकेट

कर्मचारियों की भर्ती को नए मानदंड स्थापित


चंडीगढ़ (ब्‍यूरो)। हरियाणा सरकार ने हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) के पद पर कर्मचारियों की भर्ती करने के मानदंड निर्धारित किए हैं। सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि नए मानदंड के अनुसार विभाग द्वारा अब सेवा रिकार्ड की जांच, प्रासंगिक अनुभव, शैक्षणिक उपलब्धि और अन्य उपलब्धियाें के आधार पर उम्मीदवार का मूल्यांकन किया जाएगा। विभाग सेवा रिकार्ड, अनुभव, शैक्षणिक उपलब्धि और अन्य व्यवसायिक उपलब्धियों के आधार पर अधिकतम 100 अंकों में से अंक प्रदान करेंगे। एचसीएस नामांकन के तहत पिछले दस वर्ष की एसीआर में विशेष उल्लेख के सेवा रिकार्ड के लिए 70 प्रतिशत अधिमान या कुल 100 अंकों में से 70 अंक दिये जाएंगे। प्रासंगिक अनुभव शैक्षणिक उपलब्धियों और अन्य व्यवसायिक उपलब्धियों में प्रत्येक के लिए 10 प्रतिशत अधिमान या 10 अंक दिए जाएंगे। पिछले आठ वर्षों के दौरान उम्मीदवार की कम से कम छ: एसीआर ''वैरी गुड'' श्रेणी की होनी चाहिए और दो एसीआर ''गुड'' श्रेणी से नीचे की श्रेणी की नहीं होनी चाहिए।
गत आठ वर्षों के दौरान प्रत्येक एसीआर के लिए विभाग ''आउट स्टैंडिंग'' के लिए 8.75 अंक, ''वैरी गुड'' के लिए 7 अंक और ''गुड'' के लिए 5 अंक देगा। उन्होंने बताया कि विभागाें द्वारा मेधावी उम्मीदवाराें के नाम मुख्य सचिव को भेजे जाएंगे।

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