अदालत जाएंगे पात्रता पास आवेदक


डेट बढऩे के चार दिन बाद भी ऑनलाइन सिस्टम ठप 
20-21 जुलाई तक बढ़ सकती है अंतिम तारीख 
शिक्षक भर्ती सरकारी तंत्र की सुस्ती से हजारों युवा परेशान 
अध्यापकों के करीब १५ हजार पदों के लिए निकाली गई भर्ती ने सरकार और युवा, दोनों के पसीने निकाल दिए हैं। आलम ये है कि भर्ती प्रक्रिया की अंतिम तारीख तक तय नहीं हो पा रही। चार दिन पहले सरकार ने ऑनलाइन आवेदन के लिए 9 जुलाई की तारीख तय की थी लेकिन अब तक सिस्टम में जरूरी अपडेट नहीं हो पाया है जिसकी वजह से फार्म नहीं भरे जा रहे। कई वजह से कानूनी पेचीदगियों में फंसती दिख
रही इस भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तारीख एक बार और बढ़ सकती है। 

अप्रैल-2011 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से जारी आदेश के अनुसार, सरकार को 322 दिनों में शिक्षकों की भर्ती करनी है। यूं तो राज्य में 45 हजार से ज्यादा टीचर्स की कमी है लेकिन फिलहाल अध्यापक भर्ती बोर्ड ने 15 हजार पदों के लिए ही विज्ञापन निकाला है। इस विज्ञापन में जोड़ी गई 'गुड एकेडमिक रिकॉर्ड' की शर्त को लेकर अच्छा-खासा बवाल मच चुका है जिसके बाद इस शर्त को हटाना पड़ गया। 

मौजूदा असमंजस की स्थिति इस शर्त हटाने के बाद ही पैदा हुई। पहले आवेदन की अंतिम तारीख 28 जून थी जिसे शर्त हटाए जाने के बाद 9 जुलाई तक बढ़ा दिया गया। कानूनी जानकार कहते हैं कि किसी भी शर्त से संबंधित अधिसूचना जारी होने के बाद आवेदन के लिए कम से कम 21 दिन देने जरूरी होते हैं। अगर इसे सही माना जाए तो आवेदन की अंतिम तारीख ९ की जगह 20 या २१ जुलाई तक बढ़ सकती है। 

दूसरी ओर, आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाने की घोषणा हुए चार दिन हो चुके हैं लेकिन ऑनलाइन सिस्टम में अब तक जरूरी अपडेट नहीं किए जा सके हैं। नतीजा, हरियाणा समेत कई राज्यों के हजारों बेरोजगार युवा परेशान हैं। सिस्टम में जरूरी अपडेट के लिए अध्यापक भर्ती बोर्ड को वित्तायुक्त (शिक्षा) के दफ्तर से आदेश आने का इंतजार है जबकि वित्तायुक्त दफ्तर का कहना है कि ये काम बोर्ड का है। उधर शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल कह रही हैं कि वह आदेश दे चुकी हैं। कुल मिलाकर सरकारी तंत्र के बिगड़े तालमेल की वजह से परेशान युवा हो रहे हैं। 

॥ सरकार शिक्षकों की भर्ती करना ही नहीं चाहती। इसीलिए नई-नई समस्या पैदा की जा रही हैं। आज राज्य को ४५ हजार शिक्षकों की तुरंत जरूरत है। ऐसे में फालतू शर्तें लगाने की जरूरत ही नहीं है। जो योग्य हैं, उन्हें नियुक्ति देनी चाहिए। हम इस मामले में उच्च स्तर पर पत्र भेज रहे हैं। -वजीर सिंह, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा शिक्षक संघ 

॥ हम चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी हो जाए। इसके लिए समय तय है। अगर ऑनलाइन आवेदन जमा नहीं हो पा रहे तो ये गलत है। इसके लिए संबंधित लोगों से जवाब तलब किया जाएगा। मैं इतना यकीन दिला सकती हूं कि इस सत्र में राज्य को नए अध्यापक जरूर मिलेंगे। - गीता भुक्कल, शिक्षा मंत्री हरियाणा 

ऊटपटांग की शर्तें कराती है फजीहत 

ऊटपटांग की शर्तें पहले भी परेशानी पैदा करती रही हैं। जैसे कि राज्य सरकार ने करीब एक साल पहले 31 आरोही स्कूल खोले थे। इनमें शिक्षक केवल उन्हीं को लगाया जाना था, जिन्होंने हर डिग्री प्रथम श्रेणी में ली हो। जब एक भी आवेदन नहीं आया तो मौजूदा शिक्षकों को ही लगाकर काम चलाना पड़ा। कुछ ऐसा ही इस बार भी हुआ। १५ हजार पदों के लिए विज्ञापन निकालकर आवेदन के लिए तीन लोअर परीक्षाओं (१०वीं, १२वीं व बीए) में से दो में कम से कम 50 फीसदी और एक में 45 फीसदी अंक होने अनिवार्य कर दिए। बाद में फजीहत होने पर इस शर्त को हटाना पड़ा। उधर, भर्ती में नया पेंच फंसाते हुए केन्द्र सरकार चार वर्ष के अनुभव प्रमाण पत्र को मान्यता देने से इनकार करने की बात कह रही है। 

भिवानी त्न अध्यापकों के पीजीटी पदों पर आवेदन के लिए चार साल का अनुभव रखने वालों को पात्रता परीक्षा (एचटैट) से छूट देने संबंधी फैसले को लेकर सरकार क कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पात्रता परीक्षा पास आवेदक सरकार से छूट वापस लेने की मांग कर रहे हैं जबकि सरकार अपने फैसले पर अडिग है। ऐसे में अब पात्रता पास आवेदकों ने कोर्ट जाने का फैसला किया है। 

पात्र अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष राजेंद्र शर्मा के अनुसार, सरकार ने 2009 से 2011 तक शिक्षकों की जो भर्ती की, उनमें एचटैट पास होना अनिवार्य था। अब अचानक सरकार ने छूट क्यों दी जबकि हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट इसे अनिवार्य बता चुके हैं। इसके अलावा ४ साल का अनुभव होना ही क्यों अनिवार्य बनाया गया? तीन साल ११ महीने व 29 दिन का अनुभव रखने वाला इससे वंचित क्यों है? आवेदन फॉर्म में ये कॉलम क्यों रखा गया है कि क्या आप गेस्ट टीचर हैं? इसके पीछे क्या मंशा है? राजेंद्र शर्मा ने कहा कि सरकार के इस फैसले के खिलाफ एक-दो दिन में अदालत में केस फाइल कर दिया जाएगा। 

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