संभल कर लें संस्थान में दाखिला

 बेहतर भविष्य की कामना लिए गत वर्ष राहुल ने एक बड़े मैनेजमेंट संस्थान में एमबीए में बडे़ ही उत्साह के साथ एडमिशन लिया। परंतु उसका उत्साह उस समय काफूर हो गया जब उसे पता चला कि जिस संस्थान वह एमबीए कर रहा है उसे यूजीसी की मान्यता ही नहीं है। लगातार प्रचार के जरिए प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी संस्थान होने का दावा करने कई संस्थानों के पास राहुल जैसे अनेक छात्रों के लिए कोई जवाब नहीं है। ऐसे संस्थान न तो केंद्रीय या विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम के अंर्तगत स्थापित है। इस प्रकार के संस्थान या विश्वविद्यालय फर्जी होते हैं। तथा डिग्रियां प्रदान करने का उन्हें कोई भी अधिकार नहीं है। यूजीसी के नियमों के अनुसार देश भर में 21 ऐसे विश्वविद्यालय कार्यरत हैं जो फर्जी हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव की ओर से जारी पत्र के अनुसार
कई बड़े संस्थान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956 की धारा दो की परिभाषा के अंतर्गत कोई विश्वविद्यालय नहीं है और धारा 122 के अनुसार उपाधि देने या डिग्री प्रदान करने का कोई अधिकार नहीं है। सूचना में आगे बताया गया कि ऐसे संस्थान को न तो एमबीएबीबीए व बीसीए डिग्रियां प्रदान करने का अधिकार है और न ही ये संस्था यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। इसके साथ ही कालेजों, विश्वविद्यालयों में चल रहे दाखिले को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का कहना है कि छात्र किसी भी संस्थान, विश्वविद्यालय में दाखिला लेने से पहले ये सुनिश्चित जरूर कर लें कि वह संस्थान या विश्वविद्यालय या उसके द्वारा चलाए जा रहे कोर्स यूजीसी से मान्यता प्राप्त है या नहीं। यूजीसी की संयुक्त सचिव डॉ. उर्मिला देवी के अनुसार देश में जाली विश्वविद्यालयों की बढ़ती संख्या चिंताजनक विषय है। इससे न केवल लोगों में प्रतिष्ठित संस्थान के संदेह पैदा होता है बल्कि विद्यार्थियों का धन व समय दोनों बर्बाद होते हैं।

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