याचिका में 20 अक्टूबर, 2010 के सर्कुलर पर रिव्यू डीपीसी को चुनौती देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आरके सब्बरवाल मामले में कहा था कि पदों के आधार पर रोस्टर प्रणाली होनी चाहिए। इसके तहत जिस वर्ग का पद होगा उस पर उसी वर्ग का व्यक्ति ही पदोन्नत होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण को पचास प्रतिशत की सीमा में रखने के लिए कहा था। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में 20 नवंबर 1997 को एक सर्कुलर जारी कर विभागों को इस आदेश का पालन करने का निर्देश दिया और कहा था कि किसी वर्ग के लिए निर्धारित रोस्टर सीट पर किसी दूसरे वर्ग को नियुक्ति व पदोन्नति नहीं दी जाए।
लेकिन बाद में सरकार ने सब्बरवाल मामले में दिए निर्णय के विपरीत जाकर 20 अक्टूबर 2010 का सर्कुलर जारी कर दिया और वरिष्ठ आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को सामान्य वर्ग के पदों पर पदोन्नति का प्रावधान कर दिया। याचिका में इस सर्कुलर के आधार पर दी जा रही पदोन्नति को रोकने की अपील की।