प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों से पीएचडी करने वाले हजारों विद्यार्थियों के लिए गफलत की स्थिति पैदा हो गई है। प्रदेश सरकार का कहना है कि सिर्फ उन विश्वविद्यालयों के पीएचडी धारकों को सहायक प्रोफेसर की भर्ती में तरजीह दी जाएगी, जिनको ग्रेड ए का दर्जा हासिल है। प्रदेश में दो विश्वविद्यालय ही ए ग्रेड की श्रेणी में आते हैं। हाईकोर्ट में सोमवार को राज्य सरकार को इस बारे में स्थिति स्पष्ट करनी है। हरियाणा मंत्रिमंडल द्वारा पिछले दिनों लिए गए फैसले से हजारों पीएचडी धारकों का भविष्य दांव पर लग गया है। प्रदेश सरकार द्वारा कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर की भर्ती के लिए दिए गए इस फरमान से पांच साल से निजी विश्वविद्यालयों में रिसर्च कर रहे या रिसर्च कर चुके छात्रों में मायूसी है। सरकार ने फैसले में कहा है कि उन निजी व डीम्ड विश्र्वविद्यालयों के पीएचडी धारकों को नेट से छूट मिलेगी, जिस विश्र्वविद्यालय को ए ग्रेड का दर्जा हासिल होगा। सरकार के इस फैसले पर पीएचडी धारकों द्वारा इसलिए अंगुली उठाई जा रही है, क्योंकि यहां कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय को ही ए गे्रड का दर्जा है। फिर भी सरकार अपने सरकारी विश्वविद्यालयों से पीएचडी करने वालों को नेट से छूट प्रदान कर रही है। दूसरा अहम पहलू यह है कि अभी तक यह तय नहीं हुआ कि यह फैसला कब से लागू होगा। यूजीसी के नियमों को जब नए रूप में लागू किया जाता है तो उस निर्धारित तिथि से ही नियम लागू माने जाते है। इस कारण छात्र असमंजस में हैं कि वे पिछले पांच सालों से देश के विभिन्न विश्र्वविद्यालयों से रिसर्च कर रहे हैं तो उनका भविष्य क्या होगा
निजी विश्वविद्यालयों से पीएचडी धारक सांसत में
प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों से पीएचडी करने वाले हजारों विद्यार्थियों के लिए गफलत की स्थिति पैदा हो गई है। प्रदेश सरकार का कहना है कि सिर्फ उन विश्वविद्यालयों के पीएचडी धारकों को सहायक प्रोफेसर की भर्ती में तरजीह दी जाएगी, जिनको ग्रेड ए का दर्जा हासिल है। प्रदेश में दो विश्वविद्यालय ही ए ग्रेड की श्रेणी में आते हैं। हाईकोर्ट में सोमवार को राज्य सरकार को इस बारे में स्थिति स्पष्ट करनी है। हरियाणा मंत्रिमंडल द्वारा पिछले दिनों लिए गए फैसले से हजारों पीएचडी धारकों का भविष्य दांव पर लग गया है। प्रदेश सरकार द्वारा कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर की भर्ती के लिए दिए गए इस फरमान से पांच साल से निजी विश्वविद्यालयों में रिसर्च कर रहे या रिसर्च कर चुके छात्रों में मायूसी है। सरकार ने फैसले में कहा है कि उन निजी व डीम्ड विश्र्वविद्यालयों के पीएचडी धारकों को नेट से छूट मिलेगी, जिस विश्र्वविद्यालय को ए ग्रेड का दर्जा हासिल होगा। सरकार के इस फैसले पर पीएचडी धारकों द्वारा इसलिए अंगुली उठाई जा रही है, क्योंकि यहां कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय को ही ए गे्रड का दर्जा है। फिर भी सरकार अपने सरकारी विश्वविद्यालयों से पीएचडी करने वालों को नेट से छूट प्रदान कर रही है। दूसरा अहम पहलू यह है कि अभी तक यह तय नहीं हुआ कि यह फैसला कब से लागू होगा। यूजीसी के नियमों को जब नए रूप में लागू किया जाता है तो उस निर्धारित तिथि से ही नियम लागू माने जाते है। इस कारण छात्र असमंजस में हैं कि वे पिछले पांच सालों से देश के विभिन्न विश्र्वविद्यालयों से रिसर्च कर रहे हैं तो उनका भविष्य क्या होगा
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