राज्य शिक्षक पुरस्कार को पारदर्शी बनाने की पहल
येहैं नए मानदंड: पांचवींतक की कक्षाओं को पढ़ाने वाले अध्यापकों को प्राथमिक अध्यापक श्रेणी में और कक्षा 6 से 12 तक को पढ़ाने वाले अध्यापकों को माध्यमिक स्कूल शिक्षा अध्यापकों की श्रेणी में रखा जाएगा। किसी भी अध्यापक को पुरस्कार के लिए आवेदन करने या आवेदन भेजने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 31 दिसंबर 2013 तक 15 साल का नियमित कक्षा शिक्षण अनुभव रखने वाले अध्यापक और 20 वर्ष का नियमित शिक्षण रखने वाले मुख्याध्यापक प्रधानाचार्य ही पात्र होंगे। समावेशी शिक्षा में कार्यरत अध्यापकों के लिए अनुभव 15 वर्ष से कम कर 10 वर्ष और हेडमास्टर प्रधानाचार्य के संबंध में यह अनुभव 20 से 15 वर्ष कर दिया गया है। एससीईआरटी निदेशक स्टाफ, डीईओ,डीईईओ, डीआईईटी, जीईटीटीआई, उपजिला शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, बीईईओ, एईओ सहित शैक्षणिक प्रशासक इन पुरस्कार के पात्र नहीं होंगे। पीआरटी, टीजीटी, पीजीटी, मौलिक स्कूल हेडमास्टर, हाईस्कूल हेडमास्टर एवं प्रधानाचार्य जो एससीईआरटी, एसपीडी, एसएसए के कार्यालय तथा मौलिक निदेशालय एवं माध्यमिक शिक्षा पर इन पुरस्कारों के लिए विचार किया जाएगा। इनके लिए संबंधित निदेशक सिफारिश कर राज्य चयन समिति को भेजेगा। इसके अलावा जिलास्तरीय समिति मानदंडों के अनुसार विभिन्न श्रेणी मामलों में जांच करेगी। उसमें 70 फीसदी से अधिक अंक वाले मामले हैं। उनकी सिफारिश राज्यस्तरीय समिति को जाएगी।
विचारणीय स्रोत: इसपुरस्कार के लिए शामिल होने के लिए अध्यापक की विशेष शैक्षणिक दक्षता एवं क्षमता, अध्यापन की गुणवत्ता, पेशेवर क्षमता, टीम स्प्रिट, स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर काम करना, नवीनतम अध्यापन कार्य प्रणाली, परिणाम, टीचर प्रोडक्ट्स, टीचिंग इनोवेशन, व्यक्तिगत उपलब्धियां विचारणीय स्रोत होंगे।
इसके तहत ही सिफारिश को आगे बढ़ाया जाएगा।
राज्य शिक्षक पुरस्कार को पारदर्शी बनाने की पहल
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