नई दिल्ली: किसी भी सरकारी काम-काज के लिए अब आपको वेरिफिकेशन के लिए पुलिस स्टेशन की भाग दौड़ नहीं करनी पड़ेगी। सरकारी दफ्तरों से सर्टिफिकेट बनवाने और वेरिफिकेशन के लिए केंद्र ने इस प्रक्रिया में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें पुलिस जांच के दौरान पड़ोसियों से पूछताछ की बजाय आवेदक का सिर्फ क्राइम रिकॉर्ड देखने जैसी बातें शामिल की गई हैं। पुलिस के लिए 3 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपना भी जरूरी होगा। पासपोर्ट बनवाने, आवास, पेंशन, नौकरी या कोई और सरकारी सुविधा लेने या फिर इनकम, कैरेक्टर, जाति आदि के सर्टिफिकेट बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। केंद्र ने राज्य सरकारों और अपने मंत्रालयों को लिखी चिट्ठी में कहा है कि आम लोगों को एक सर्टिफिकेट बनवाने के लिए बेवजह परेशानी उठानी पड़ती है। राज्यों के अलग-अलग कानून होने से उन्हें हर जगह नए सिरे से सरकारी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। ऐसे में सभी जगह एक जैसा कानून होना चाहिए। गलत सूचना देने पर कड़ी सजा का प्रावधान सरकार ने सर्टिफिकेट बनवाने के लिए आवेदक की ओर से कोई भी गलत सूचना देने पर कड़ी सजा का प्रावधान भी किया है। इसके तहत, गलत सूचना देने पर एक साल की जेल, गलत प्रूफ देने पर 3 साल की जेल और जानबूझकर सूचना छिपाने पर 2 साल की जेल का प्रस्ताव है। इस तरह से होगी आसानी रेजिडेंशियल प्रूफ के रूप में 5 साल के बजाय 2 साल पुराने कागजात ही देखे जाएं। अगर कोई 2 साल से भी कम समय से कहीं रहा है, तो भी उसे सर्टिफिकेट देने से मना नहीं किया जाएगा। ऐसे मामले देखने के लिए राज्य सरकारें अलग अधिकारी नियुक्त करेंगी। अगर किसी सरकारी अधिकारी की ओर से वेरीफिकेशन जरूरी है, तो इसकी बजाय आवेदक के घर के आसपास के कोई दो व्यक्ति उसे वेरिफाई कर सकते हैं। बशर्ते वेरिफाई करने वालों के पास आधार, राशन कार्ड या अन्य पहचान-पत्र हो। सुविधा सेंटर और उसकी वेबसाइट पर फॉर्म मिलेंगे। फॉर्म को इन सेंटरों पर जमा करके सर्टिफिकेट भी यहीं से जारी किए जाएंगे।
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