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ऑनलाइन प्रणाली से पढ़ाई ऑफलाइन
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़ : प्रदेश के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए छात्रों के प्रवेश फार्म सहित अन्य रिकार्ड ऑनलाइन करना जी का जंजाल बन गया है। स्कूलों में इंटरनेट कनेक्शन, कंप्यूटर टीचर्स और पर्याप्त बजट न होने के कारण रिकार्ड ऑनलाइन करने में स्कूल हेड के पसीने छूट रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में बिजली संकट जले पर नमक छिड़कने का काम कर रहा है। शिक्षकों का अधिकांश समय रिकॉर्ड ऑनलाइन करने में बीतने से पढ़ाई बाधित हो रही है।1छात्रों के आधार कार्ड व जन्म प्रमाण पत्र में नाम व जन्म तिथि अलग-अलग होने से कंप्यूटर में फार्म लोड ही नहीं हो रहे। डाटा अलग होने पर अनेक छात्रों के फार्म कंप्यूटर रिजेक्ट कर रहा है। छात्रों का राशन कार्ड व बोनाफाइड प्रमाण पत्र न होना भी शिक्षकों के लिए परेशान का सबब बना हुआ है। दूसरे राज्यों के हरियाणा में पढ़ रहे छात्रों के आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र और यहां तक की राशन कार्ड भी नहीं है। इससे स्कूल मुखिया सकते में हैं। शिक्षा निदेशालय की ओर से उन्हें 30 मई तक हर हाल में सभी छात्रों का रिकार्ड प दाखिला फार्म ऑनलाइन करने के निर्देश मिले हुए हैं। प्रत्येक स्कूल में अधिकांश छात्रों के पास पूरे दस्तावेज न होने से अभी तक लगभग चालीस प्रतिशत छात्रों का रिकार्ड ही ऑनलाइन हो पाया है। कुछ उच्च व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में तैनात स्कूल इंफार्मेशन मैनेजर भी अन्य स्कूलों का रिकार्ड ऑनलाइन करने में आनाकानी कर रहे हैं। बजट का प्रावधान न होने के कारण स्थानीय साइबर कैफे की मदद भी स्कूल हेडमास्टर नहीं ले पा रहे। मौलिक स्कूलों में हालात सबसे अधिक बदतर हैं, चूंकि यहां पर इंटरनेट कनेक्शन बिल्कुल नहीं हैं। यहां शिक्षक व हेडमास्टर खुद का इंटरनेट कनेक्शन लेकर काम चला रहे हैं, लेकिन स्पीड कम होने से फार्म खुलने में ही काफी समय लग जा रहा है। शिक्षकों ने इन समस्याओं को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव टीसी गुप्ता को मामले से अवगत कराने का निर्णय लिया है। एलिमेंटरी स्कूल हेडमास्टर एसोसिएशन ने प्रधान सचिव को पत्र लिखकर शिक्षा विभाग से ये कार्य कराने की मांग की है। एसोसिएशन के प्रधान दलबीर मलिक का कहना है कि वे ऑनलाइन प्रणाली का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन स्कूलों में पर्याप्त संसाधन न होने के कारण दिक्कतें आ रही हैं।
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