पात्र अध्यापक पर जज ने लगाया 30 हजार का जुर्माना

पात्र अध्यापक ने गेस्ट अध्यापकों के खिलाफ गलत तथ्य पेश कर कोर्ट को गुमराह करने की करी कोशिश
माननीय हाई कोर्ट को गुमराह करने पर पात्र अध्यापक पर जज ने लगाया 30 हजार का जुर्माना 

गेस्ट टीचरों ने किया माननीय हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत
चंडीगढ़ - माननीय हाई कोर्ट में पात्र अध्यापक की तरफ से गेस्ट टीचरों को कोर्ट ऑफ़ कंटेम्प्ट के तहत अभी तक न हटाने के मामले में आज अंतिम सुनवाई हुई जिसमे माननीय जज महेश ग्रोवर की कोर्ट ने पात्र अध्यापक ब्रिजेश पर गलत आंकड़े पेश कर कोर्ट को गुमराह करने व कोर्ट का समय बर्बाद करने के मामले में 30 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।
पात्र अध्यापक ब्रिजेश वर्सिज स्टेट ऑफ़ हरियाणा के सीओसीपी नंबर 718 केश में मंगलवार को अंतिम सुनवाई हुई जिसमे ब्रिजेश ने अपने वकील जगबीर मलिक के माध्यम से निर्धारित समय सीमा के तहत नियमित भर्ती न करने व गेस्ट टीचरों को अभी तक न हटाने की मांग की थी। वहीं माननीय हाई कोर्ट ने ब्रिजेश के वकील जगबीर मलिक के तथ्यों को गलत पाया। माननीय जज महेश ग्रोवर ने ये कहते हुए इस याचिका को ख़ारिज कर दिया कि तिलकराज का केश पब्लिक इंटरेस्ट में था जबकि ब्रिजेश ने ये याचिका व्यक्तिगत हित में लगाई है। और साथ ही गलत आंकड़े पेश कर कोर्ट को गुमराह किया व उसका समय बर्बाद किया है। माननीय न्यायालय ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जगबीर मलिक को गेस्ट टीचर मामले में पूर्णतया जानकारी होते हुए भी कोर्ट को गुमराह किया। शुरू में माननीय जज महेश ग्रोवर ने 1 लाख 50 हजार रुपए का जुर्माना याचिकाकर्ता पर लगाना शुरू किया था लेकिन उनके वकील द्वारा बार बार माफ़ी देने की गुहार लगाने के बाद अंत में ये जुर्माना 30 हजार लगा दिया गया।
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