गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में भी मिड डे मील की तैयारी

सर्वशिक्षा अभियान के जरिये स्कूली शिक्षा की पहंुच को बढ़ाने में मिली कामयाबी के बाद भी वंचित तबकों की पढ़ाई-लिखाई के लिए अभी भी बहुत कुछ करने की गुंजाइश है। शायद यही वजह है कि देश के अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अनुसूचित जाति (एसटी) बहुल लगभग 170 जिलों में सरकार से गैर सहायता प्राप्त (अनएडेड) स्कूलों के बच्चों को भी मिड डे मील उपलब्ध कराने की तैयारी हो रही है। खुद सरकार मानती है कि वंचित और कमजोर तबकों, खासतौर से अनुसूचित जाति और जनजाति की ज्यादा आबादी वाले जिलों में स्कूली शिक्षा पर और ध्यान दिए जाने की जरूरत है। बीते वर्षों में मिड डे मील (दोपहर का भोजन) योजना बच्चों को स्कूल में रोकने में कारगर साबित हुई है। रिपोर्टो से यह भी बात सामने आई है कि योजना में गड़बडि़यों की शिकायतों के बावजूद वह विभिन्न समुदायों को जोड़ने में सामाजिक समावेशी (सोशल इन्क्लूजर) की बड़ी भूमिका भी निभा रहा है। लिहाजा इसे और विस्तार की जरूरत है। 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) के लिए स्कूली शिक्षा के लिए गठित कार्यसमूह ने भी देश में अनुसूचित जनजाति बहुल 109 जिले और अनुसूचित जाति बहुल 61 जिलों में सरकार से गैर सहायता प्राप्त स्कूलों के बच्चों को भी मिड डे मील उपलब्ध कराने की सिफारिश की है। प्रस्ताव फिलहाल योजना आयोग के विचाराधीन है। गौरतलब है कि अभी सर्वशिक्षा अभियान के तहत सरकारी, सरकार से सहायता प्राप्त, शिक्षा गारंटी योजना, राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना स्कूल के साथ ही मदरसों व मकतबों के कक्षा एक से आठ तक 10.54 करोड़ स्कूली बच्चों को मिड डे मील दिया जा रहा है। मिड डे मील की शिकायतों में अव्वल है उत्तर प्रदेश जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली : सरकारी योजनाओं में अक्सर किसी न किसी गड़बड़ी या घोटाले को लेकर चर्चा में रहने वाला उत्तर प्रदेश बच्चों के दोपहर के भोजन (मिड डे मील) की शिकायतों में भी सबसे आगे है। बीते साल में ही इस योजना में देशभर से केंद्र को कुल 34 शिकायतें मिलीं, जिनमें 11 अकेले उत्तर प्रदेश से ही रहीं। जबकि, 2010 में गड़बडि़यों की
कुल 17 शिकायतों में चार और 2009 की कुल 35 शिकायतों में 11 इसी प्रदेश से थीं

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