सरकार के खिलाफ गरजे स्कूल संचालक


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सरकार के खिलाफ गरजे स्कूल संचालक

6गांधी की पुण्यतिथि पर प्रदेश स्तरीय विराट शिक्षा सम्मेलन 1

निजी स्कूलों को देना ही पड़ेगा गरीबों को दाखिला


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जागरण संवाददाता, अंबाला : ‘एक स्कूल खोल दो, एक जेल बंद हो जाएगी। महात्मा गांधी के इस सिद्धांत के विपरीत प्रदेश सरकार एक स्कूल खोलने पर जेल में डालने की बात कह रही है। शायद उसे अंदेशा नहीं कि दस साल पहले एक पार्टी के सुप्रीमो (इनेलो की ओर इशारा) ने भी यही बात दोहराई थी जिसके चलते आज वह सत्ता के लिए तरस रहे हैं। यह बात बृहस्पतिवार को प्रदेश स्तरीय विराट शिक्षा सम्मेलन में फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के मंच से बोली गई। सम्मेलन के दौरान एसडीएम को मुख्यमंत्री व राहुल गांधी के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया। 1अंबाला छावनी के गांधी ग्राउंड में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आयोजित इस सम्मेलन की अध्यक्षता एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने की। प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि 2013 तक स्थापित हो चुके सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों को कमरों की संख्या के मुताबिक एकमुश्त मान्यता प्रदान की जाए। स्थाई मान्यता प्राप्त स्कूलों को पुराने नियमों के तहत अपग्रेड किया जाए। उन्होंने 10वीं व 12वीं तक स्कूल के लिए 1,000 वर्ग मीटर भूमि निर्धारित करने और 5वीं कक्षा में पहली मंजिल पर 30 प्रतिशत छूट की तरह 8वीं, 10वीं और 12वीं में भी रियायत देने की मांग की। उन्होंने कहा कि आरटीई अधिनियम हटाया जाए क्योंकि जब से यह कानून बना है तभी से शिक्षकों को एचटेट देना पड़ रहा है। इसके अलावा 134ए नियम के तहत स्कूलों में 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को एडमिशन देने का आदेश थोपकर स्कूल संचालकों व अभिभावकों को लड़ाया जा रहा है। पहले प्राइवेट स्कूल संचालक 10 प्रतिशत दाखिले देने पर राजी थे लेकिन अब एक प्रतिशत भी नहीं देंगे। 1सम्मेलन में गुजरात के शिक्षा मॉडल को आदर्श बताया गया। जामनगर से आई एकता ने बताया कि नरेंद्र मोदी ने आरटीई को चार हिस्सों में बांटकर लागू कर रखा है जिससे प्रदेश में शिक्षकों व स्कूल संचालकों को कोई दिक्कत नहीं हैं। सम्मेलन के अंत में अंबाला के एसडीएम विनय प्रताप सिंह दो मिनट के लिए मुख्यमंत्री व राहुल गांधी के नाम ज्ञापन लेने के लिए पहुंचे। इस दौरान अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, सोनीपत, रोहतक, पानीपत, चंडीगढ़ व पंजाब समेत अन्य जगहों से फेडरेशन के पदाधिकारी मौजूद थे। 1दूसरे राज्यों में नहीं प्रॉब्लम : सोनीपत से आए स्कूल संचालक श्याम लाल ने कहा कि हरियाणा को छोड़कर पंजाब, दिल्ली, गुजरात और हिमाचल में कहीं स्कूल संचालकों को कोई दिक्कत नहीं है। राज्य सरकार बच्चों को वर्दी, खाना, निशुल्क शिक्षा व किताबें जरूर दे रही है लेकिन शिक्षा का स्तर काफी नीचे है। रवि भूषण ने कहा कि 134ए कोटे के तहत 10 प्रतिशत बीपीएल परिवारों के बच्चों को दाखिला देने पर सहमति बनी थी लेकिन जिस तरह नए-नए नार्म्स स्कूल संचालकों पर लग रहे हैं, ऐसी स्थिति में किसी को दाखिला नहीं दिया जाएगा। संजीव भारद्वाज ने कहा कि कई राज्य सरकारों ने स्कूलों के लिए सीएलयू प्रक्रिया कर दी है, जिससे स्कूल संचालकों पर लाखों रुपये का बोझ नहीं पड़ता। कुरुक्षेत्र के कर्म सिंह ने कहा कि कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मुलाना का उनकी सभी मांगें मानने का वादा झूठा निकला। पंजाब स्कूल एसोसिएशन के प्रधान महासचिव तेजपाल सिंह ने कहा कि 134ए ने पूरे देश में भूचाल ला दिया है।यशपाल शर्मा, चंडीगढ़ 1आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को दाखिलों में दस फीसद आरक्षण देने का आदेश निजी स्कूलों के गले की फांस बन गया है। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद प्रदेश सरकार निजी स्कूलों के साथ कोई रियायत बरतने के मूड में नहीं है। स्कूल शिक्षा विभाग की प्रधान सचिव सुरीना राजन ने सरकुलर जारी कर निजी स्कूलों को गरीब बच्चों को पहली से 12वीं कक्षा तक दस फीसद सीटों पर आरक्षण देने का निर्देश दिया है। जिन स्कूलों ने प्रदेश सरकार से रियायती दरों पर भवन के लिए भूमि ली है उन्हें दाखिला में 20 प्रतिशत आरक्षण देना होगा। प्रक्रिया एक महीने में पूरी करनी होगी। 1 निजी स्कूल संचालक जहां गरीबों को स्कूल में दाखिला देने के विरोध में आंदोलन का झंडा बुलंद किए हुए हैं, वहीं स्कूल शिक्षा विभाग दाखिला में आरक्षण लागू कराने के लिए शिद्दत से जुटा हुआ है। विभाग के नए सरकुलर से निजी स्कूलों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। सभी निजी स्कूल संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वे दाखिला में आरक्षण देने की प्रकिया जल्द पूरी कर सारा रिकार्ड जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपे। दाखिला में आरक्षण की जानकारी सूचना पट पर देने के साथ ही वेबसाइट पर भी डाली जाए। विभाग की प्रधान सचिव सुरीना का कहना है कि निजी स्कूलों को गरीब बच्चों को दाखिला देना ही होगा। 1नरमी बरत रही सरकार : सत्यवीर 1 निजी स्कूलों में गरीब बच्चों को दाखिला में 25 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए आंदोलनरत दो जमा पांच मुद्दे जनआंदोलन के संयोजक एडवोकेट सत्यवीर हुड्डा का कहना है कि प्रदेश सरकार निजी स्कूलों पर सख्ती बरतने के बजाय नरम रवैया अपनाए हुए है। यही कारण है कि स्कूल संचालक बच्चों को आरक्षण देने की बजाय धरने व सम्मेलन कर रहे हैं। कैबिनेट ने निजी स्कूलों की बसों को टैक्स मुक्त कर दिया है, जो स्कूल संचालकों व सरकार के बीच की सांठगांठ को दर्शाता है।1स्पष्ट गाइडलाइन तय हो : शर्मा 1फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा के मुताबिक शिक्षा विभाग के सकरुलर से कुछ नहीं होने वाला। निजी स्कूलों में गरीबों के आरक्षण के लिए स्पष्ट गाइडलाइन बनाई जाए और उनकी पढ़ाई पर आने वाला खर्च सरकार वहन करे। जब तक उनकी शंकाओं का निवारण कर पढ़ाई का खर्च नहीं दिया जाता, गरीब बच्चों को निजी स्कूल दाखिला नहीं देंगे।अंबाला छावनी के गाधी मैदान में हुए सम्मेलन में मौजूद स्कूल संचालक।

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