Rohtak: एमडीयू में अब पीएचडी के लिए एंट्रेंस टेस्ट जरूरी कर दिया गया है। एंट्रेंस एग्जाम पास करने वाले अभ्यर्थियों के लिए ही अब पीएचडी रजिस्ट्रेशन का रास्ता आसान होगा। नेट पास करने वाले अभ्यर्थियों को इस एंट्रेंस से छूट रहेगी लेकिन एंट्रेंस टेस्ट पास करके एमफिल करने वाले अभ्यर्थियों को पीएचडी के लिए दोबारा एंट्रेंस देना होगा। इस मुद्दे पर एसी की बैठक में जोरदार बहस भी हुई और आखिरी में यूनिवर्सिटी प्रशासन को इसे लागू करना ही पड़ा। बैठक में यूनिवर्सिटी के नये रीजनल सेंटर शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा गया था, जिसे पारित कर दिया गया है। एमडीयू की वन प्वॉइंट एजेंडा पर बृहस्पतिवार को बुलाई गई 176वीं एसी की आपात बैठक में दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पीएचडी के लिए यूजीसी के निर्देशों के तहत एंट्रेंस टेस्ट का प्रस्ताव इस बैठक में रखा गया। इससे पहले यह प्रस्ताव 12 अगस्त को हुई ईसी की बैठक में रखा गया था, लेकिन इसमें संशोधन करने के लिए इस प्रस्ताव को लौटा दिया गया था। प्रस्ताव के मुताबिक यूनिवर्सिटी प्रशासन एमडीयू या अन्य स्टेट यूनिवर्सिटी के उन अभ्यर्थियों को टेस्ट से छूट देना चाहता था जिन्होंने एमफिल केलिए एंट्रेंस पहले ही पास कर लिया है। लेकिन कुछ सदस्यों ने इस पर एतराज जताया और एंट्रेंस एग्जाम सभी के लिए जरूरी करने के लिए कहा। प्रस्ताव को लेकर काफी देर बहस होने के बाद सदस्यों की बात को माना गया और एमफिल वालों केलिए भी यह टेस्ट जरूरी कर दिया गया है। ठीक होगा रिसर्च का स्तर सूत्रों का कहना है कि एमफिल और पीएचडी के एंट्रेंस टेस्ट तकरीबन समान ही होता है। ऐसे में अब जो अभ्यर्थी पहले एमफिल का टेस्ट दे चुके हैं उन्हें पीएचडी के लिए उसी स्तर का टेस्ट दोबारा देना पड़ेगा। हालांकि इससे अभ्यर्थियों को ही बेहतर मौका मिलेगा और रिसर्च का स्तर भी ठीक होगा।
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