69 विधायकों 10 सांसदों को पंचकूला में प्लॉट अलॉटमेंट पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब



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69 विधायकों 10 सांसदों को पंचकूला में प्लॉट अलॉटमेंट पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
हुड्डा सरकार ने लिया था प्लॉट देने का फैसला, अब सुनवाई 12 जनवरी को
ललित कुमार | चंडीगढ़
सरकारकी रियायती योजनाएं नेताओं और नौकरशाहों के लिए ही क्यों होती हैं। यह योजनाएं कमजोर अथवा जरूरतमंदों के लिए क्यों नहीं होती। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को यह टिप्पणी हरियाणा के विधायकों सांसदों को प्लाॅट अलाॅटमेंट की हुड्डा सरकार की योजना पर की।
सरकारने दोबारा विचार को मांगा समय
मौजूदासरकार ने योजना पर दोबारा विचार करने के लिए समय दिए जाने की मांग की। इस पर जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस हरिपाल वर्मा की खंडपीठ ने 12 जनवरी के लिए सुनवाई तय की है।
पंचकूला की हेरॉल्ड को-आॅपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसायटी की तरफ से याचिका दायर कर कहा गया कि हरियाणा के 69 विधायकों और 10 सांसदों को पंचकूला में हरियाणा सरकार की तरफ से रियायती दरों पर हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हुडा) के प्लाॅट देने का फैसला लिया गया है। यह गलत है। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा था। बुधवार को जवाब दाखिल करते हुए हरियाणा सरकार ने कहा कि विधायकों और सांसदों को रियायती प्लॉट देने की नीति पर सरकार दोबारा विचार कर रही है।
यह लिखा था सूची में
इससेपहले सोसायटी की तरफ से 79 सांसद विधायकों की सूची सौंपी गई थी, जिन्हें मनसा देवी कांप्लेक्स में प्लाॅट दिए जा रहे हैं। याचिका में कहा गया कि विधानसभा भंग होने वाली है। ऐसे में सरकार सांसद विधायकों को पंचकूला और गुड़गांव जैसे शहरों की महंगी जमीन तोहफे में देना चाहती है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) ने स्पेशल स्कीम के तहत प्लाॅट देने का फैसला किया है, जो समानता के अधिकार का उल्लंघन है। इन्हें कोई विशेषाधिकार नहीं दिया जा सकता।
मनसा देवी कांप्लेक्स में बांटे गए थे प्लॉट
सोसायटीने याचिका में हरियाणा सरकार की उस नीति को चुनौती दी थी, जिसके तहत विधायकों और सांसदों को पंचकूला के मनसा देवी काम्पलेक्स में प्लॉट देने का निर्णय लिया गया था। सरकार ने बाजार से बहुत कम दामों पर 14 मरले के प्लाॅटों को राजनेताओं को आवंटित करने का फैसला लिया था। याची ने कहा कि जिस प्लॉट की कीमत 1.5 करोड़ थी, उसे महज 28 लाख रुपए में दिया जाना तय किया गया। सरकार ने मामले में जवाब दायर कर कहा कि वे इस नीति की समीक्षा कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने इस पर टिप्पणी कर कहा कि समाज के एक बड़े वर्ग को इस तरह की सुविधाओं की जरूरत है लेकिन सरकार राजनेताओं और नौकरशाहों के लिए स्कीम तैयार कर रही है। आम आदमी के लिए इस तरह की कोई योजना नहीं लाई जाती।
चंडीगढ़ में ठहरने की व्यवस्था होने का हवाला
पिछलीहुडा सरकार ने विधानसभा सत्र के दौरान विधायकों के चंडीगढ़ में ठहरने की उचित व्यवस्था होने का दावा करते हुए उनके लिए पंचकूला में प्लाॅट अलाॅट करने की योजना निकाली थी। वहीं, दूसरी ओर चंडीगढ़ स्थित सुखना लेक राजीव गांधी आईटी पार्क के समीप सेक्टर 6 स्थित मनसा देवी कांप्लेक्स में विधायकों और सांसदों को 14 मरला प्लाॅट अलाॅट करने की योजना थी। याचिका में कहा गया कि सेक्टर-छह स्थित मनसा देवी कांप्लेक्स में दी गई जगह हाई स्कूल को दी जानी थी। यह जन साधारण को शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित करना है। इसके अलावा यह भी तर्क था कि जनसंख्या घनत्व के हिसाब से भी संबंधित जगह प्लाॅट के लिए नहीं दी जा सकती।

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