शिक्षा के गिरते स्तर और स्कूली विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए शिक्षा निदेशालय ने उठाया कदम



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शिक्षा के गिरते स्तर और स्कूली विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए शिक्षा निदेशालय ने उठाया कदम

सरकारीस्कूलोंमें अब बिना अभिभावकों की अनुमति के बच्चे स्कूल समय में स्कूल से बाहर नहीं जा सकेंगे। यदि किसी बच्चे को स्कूल से बाहर जाना है तो उसे बाकायदा अपने पेरेंट्स को स्कूल लेकर आना हाेगा। उसके बाद ही उसे बाहर जाने की अनुमति दी जाएगी। इसके विपरीत यदि स्कूली समय में बच्चा स्कूल से बाहर पाया गया तो स्कूल मुखिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जी हां, यह एकदम सच है। हरियाणा शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को लिखित में निर्देश भेज दिए हैं। निर्देशों के अनुसार बच्चे के अभिभावक की अनुमति मिलने के बाद मुखिया को अभिभावक के हस्ताक्षर एक रजिस्टर में कराने होंगे। पूरी प्रक्रिया के बाद ही बच्चे को स्कूल के गेट से बाहर भेजने की अनुमति दी जाएगी। इतना ही नहीं स्कूलों में हाजिरी रजिस्टर पर भी निगरानी रखनी होगी ताकि बच्चे पर निगरानी रखी जा सके।
इसलिए उठाया कदम
अकसरदेखने में आता है कि बच्चा बिना किसी की अनुमति से स्कूल के गेट से बाहर निकल जाता है। इस दौरान उसके साथ कोई भी हादसा हो जाता है। हादसा होने के बाद ही स्कूल मुखिया को पता चलता है कि बच्चा स्कूल समय में गेट से बाहर गया था। इस दौरान तो अभिभावकों को अपने बच्चे की कोई जानकारी होती है ही स्कूल को। इसी कारण स्कूल समय में होने वाली अप्रिय घटनाओं पर अंकुश उठाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
लड़कियों की सुरक्षा पर भी उठते रहे सवाल
प्रदेशमें समय-समय पर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों की सुरक्षा पर सवाल उठते रहे हैं। कोई ध्यान नहीं देने के कारण स्कूली छात्राएं कई बार बहकावे में आकर गलत कदम उठा देती हैं जोकि उनके भविष्य पर भारी पड़ जाता है। इस तरह के दर्जनों मामले सामने आना आम बात है। शिक्षा विभाग के इस कदम से ऐसे मामलों पर भी अंकुश लगाने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
50 स्कूलों का रहा है शून्य फीसदी परिणाम
यहकदम उस वक्त उठाया गया है जब प्रदेशभर में 50 स्कूलों का 10वीं और 12वीं का 0 फीसदी परीक्षा परिणाम रहा है। अम्बाला जिले के तीन स्कूल (दो 10वीं एक 12वीं)भी इस सूची में शामिल हैं। साथ ही 82 स्कूल एेसे भी हैं, जिनका परिणाम 10 फीसदी से कम रहा। शिक्षा विभाग ने इस लेटर को जारी कर एक साथ दो काज साधने का काम किया है। इससे पहले इसी वर्ष स्कूलों में गाइड पर पूरी तरह से शिक्षा निदेशालय ने बैन लगा दिया था।
^इस तरह की जिम्मेदारी पहले से ही स्कूल अपने स्तर पर रखते हैं, लेकिन इस तरह के कोई आदेश आए हैं या नहीं, फिलहाल जानकारी नहीं है। मैं एक-दो दिन से विभागीय काम से बाहर थी। विद्यार्थियों खासकर लड़कियों की सुरक्षा के लिए यह प्रयास अच्छा है। वंदनागुप्ता, जिलाशिक्षा अधिकारी, अम्बाला

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