21 जाली विवि पर यूजीसी सख्त


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 21 जाली विवि पर यूजीसी सख्त
कविता जोशी.नई दिल्ली
यूजीसी ने फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची वेबसाइट पर डाली,
जबलपुर का केसरवानी विद्यापीठ भी फर्जी नकेल
यूजीसी की वेबसाइट पर मौजूद इस सूची में मध्य-प्रदेश का
केसरवानी विद्यापीठ, जबलपुर भी शामिल है। इस सूची में दिल्ली
के 5 विश्वविद्यालय भी हैं, जिनमें कर्मशियल यूनिवर्सिटी
लिमिटेड, दरियागंज, यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी, वोकेशनल
यूनिवर्सिटी, एडीआर-सेंट्रिक ज्यूरिडिकल यूनिवर्सिटी और
इंडियन इंस्ट्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग शामिल है। उत्तर-
प्रदेश के सर्वाधिक 9 जाली विश्वविद्यालय भी यूजीसी की
सूची में हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र, पश्चिम-बंगाल, तमिलनाडु, केरल
और बिहार का एक-एक फर्जी विश्वविद्यालय इसमें शामिल है।
यहां बता दें कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय भी इस
मामले पर काफी सख्त है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री
स्मृति ईरानी ने इस बाबत राज्यसभा में सांसदों को अवगत कराया
था।
देश में चल रहे 21 जाली विश्वविद्यालयों को लेकर
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) सख्त हो गया है और उसने
छात्रों से इनमें दाखिला न लेने की हिदायत दी है। उच्च-शिक्षा
देने के मकसद से खोले गए इन संस्थानों को लेकर यूजीसी का कहना है
कि ये विश्वविद्यालय यूजीसी के वर्ष 1956 के कानून का सीधा
उल्लंधन कर रहे हैं। इसके अलावा ये स्नातक और परास्नातक
पाठय़क्रमों के जरिए छात्र-छात्राओं को डिग्रियां भी जारी
कर रहे हैं। वास्तव में इन संस्थानों को डिग्री जारी करने का कोई
अधिकार नहीं है, क्योंकि इनकी स्थापना केंद्र-राज्य के कानून के
अलावा यूजीसी के कानून के तहत नहीं की गई है। अब इन गैरकानूनी
विवि को लेकर यूजीसी क्या कानूनी कार्रवाई कर रहा है अभी
यह स्पष्ट नहीं है। यूजीसी ने इस मामले पर छात्रों/ अभिभावकों और
पब्लिक को इस बारे में अवगत कराने के लिए जारी
विश्वविद्यालयों की सूची अपनी वेबसाइट पर जारी की है। इस
तरह के विश्वविद्यालयों के खिलाफ यूजीसी कानून और भारतीय
दंड संहित के तहत कार्रवाई की जाएगी। यूजीसी ने न्यायालयों में
मामले भी दर्ज कराए हैं। जहां तक इस तरह के संस्थानों को बंद करने
का मामला है तो इसके लिए संबंधित राज्य सरकार को कार्रवाई
करने का अधिकार है। आयोग ने इन 21 विश्वविद्यालयों के कुलपति,
को इन्हें बंद करने को लेकर लिखित में जानकारी दे दी है। राज्यों
और केंद्र-शासित प्रदेशों के प्रमुख सचिवों को उनके एकाधिकार
क्षेत्र में पड़ने वाले विश्वविद्यालयों-संस्थानोंके खिलाफ
कार्रवाई करने को लेकर रिमांडर भेजे जा चुके हैं।
मगर, अब तक कोई ठोस कार्रवाई होती दिख नहीं रही, सो
यूजीसी ने छात्रों को खबरदार करना शुरू कर दिया है ताकि वे
समय रहते चेत जाएं उनके भविष्य केसाथ खिलवाड़ न हो।

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