शिक्षा विभाग ने रखी शर्त, तिथि बदलवाने के लिए सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कराना जरूरी
ये होती है गड़बड़ी 1बच्चे को दाखिला दिलाते वक्त अभिभावक अंदाजे से जन्म तिथि लिखवा देते हैं। उस समय स्कूल मुखिया भी नहीं बताते हैं कि भविष्य में दिक्कत हो सकती है। इस तरह विभाग के रिकॉर्ड में वही जन्म तिथि दर्ज हो जाती है। बाद में जन्म प्रमाण पत्र में यदि तिथि भिन्न हो तो उसे रिकॉर्ड में ठीक करवाना जरूरी होता है। उस स्थिति में विभाग का कहना है कि जन्मतिथि ठीक करवाने के लिए जन्म प्रमाण पत्र के अलावा अभिभावकों की तरफ से एक शपथ पत्र व दो समाचारों की कटिंग लाना जरूरी है जिसमें सार्वजनिक सूचना लिखी हो
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ये होती है गड़बड़ी 1बच्चे को दाखिला दिलाते वक्त अभिभावक अंदाजे से जन्म तिथि लिखवा देते हैं। उस समय स्कूल मुखिया भी नहीं बताते हैं कि भविष्य में दिक्कत हो सकती है। इस तरह विभाग के रिकॉर्ड में वही जन्म तिथि दर्ज हो जाती है। बाद में जन्म प्रमाण पत्र में यदि तिथि भिन्न हो तो उसे रिकॉर्ड में ठीक करवाना जरूरी होता है। उस स्थिति में विभाग का कहना है कि जन्मतिथि ठीक करवाने के लिए जन्म प्रमाण पत्र के अलावा अभिभावकों की तरफ से एक शपथ पत्र व दो समाचारों की कटिंग लाना जरूरी है जिसमें सार्वजनिक सूचना लिखी हो
फतेहाबाद : सरकारी स्कूलों में दाखिले के वक्त बच्चों की जन्म तिथि में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। अब शिक्षा विभाग ने आदेश दिया है कि यदि जन्म तिथि को ठीक करवाना है तो जन्म प्रमाणपत्र के अलावा सार्वजनिक सूचना भी जारी करवानी होगी। सार्वजनिक सूचना पर कम से कम दो हजार रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में दिक्कत उन अभिभावकों के सामने हैं, जिनकी आर्थिक हालत ठीक नहीं है। 1यूं तो सरकारी स्कूलों में पढ़ाई मुफ्त होती है, मगर विभाग के इस आदेश ने शिक्षा के अधिकार को भी संकट में डाल दिया है। क्योंकि सरकारी स्कूलों में ज्यादातर गरीब परिवारों के ही बच्चे पढ़ते हैं। जब विभाग के दावा करता है कि बच्चों को वजीफे से लेकर दोपहर का खाना तक सरकार की तरफ से मुफ्त है तो एक त्रुटि को दूर करने के लिए इस आदेश का मतलब क्या समझा जाए। फिलहाल स्थिति ये है कि शिक्षक अभिभावकों को कहते हैं कि उन्हें जन्म तिथि ठीक करवानी है तो अखबारों में सार्वजनिक सूचना जारी करवाई। कम से कम दो अखबारों में प्रकाशित करवाना जरूरी है। 1चूंकि सार्वजनिक सूचना का अपना कानूनी महत्व होता है, इसलिए इसकी फीस होती है। दो राष्ट्रीय समाचार पत्रों में सार्वजनिक सूचना जारी करवाने की फीस करीब दो हजार रुपये बनती है। ऐसे में गरीब परिवारों के लिए यह आदेश परेशान करने वाला ही है।जागरण संवाददाता, फतेहाबाद : सरकारी स्कूलों में दाखिले के वक्त बच्चों की जन्म तिथि में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। अब शिक्षा विभाग ने आदेश दिया है कि यदि जन्म तिथि को ठीक करवाना है तो जन्म प्रमाणपत्र के अलावा सार्वजनिक सूचना भी जारी करवानी होगी। सार्वजनिक सूचना पर कम से कम दो हजार रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में दिक्कत उन अभिभावकों के सामने हैं, जिनकी आर्थिक हालत ठीक नहीं है। 1यूं तो सरकारी स्कूलों में पढ़ाई मुफ्त होती है, मगर विभाग के इस आदेश ने शिक्षा के अधिकार को भी संकट में डाल दिया है। क्योंकि सरकारी स्कूलों में ज्यादातर गरीब परिवारों के ही बच्चे पढ़ते हैं। जब विभाग के दावा करता है कि बच्चों को वजीफे से लेकर दोपहर का खाना तक सरकार की तरफ से मुफ्त है तो एक त्रुटि को दूर करने के लिए इस आदेश का मतलब क्या समझा जाए। फिलहाल स्थिति ये है कि शिक्षक अभिभावकों को कहते हैं कि उन्हें जन्म तिथि ठीक करवानी है तो अखबारों में सार्वजनिक सूचना जारी करवाई। कम से कम दो अखबारों में प्रकाशित करवाना जरूरी है। 1चूंकि सार्वजनिक सूचना का अपना कानूनी महत्व होता है, इसलिए इसकी फीस होती है। दो राष्ट्रीय समाचार पत्रों में सार्वजनिक सूचना जारी करवाने की फीस करीब दो हजार रुपये बनती है। ऐसे में गरीब परिवारों के लिए यह आदेश परेशान करने वाला ही है।

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