जाटों समेत पांच जातियों को आरक्षण का लाभ बंद
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़ : हाईकोर्ट की फटकार के बाद हरियाणा सरकार ने शिक्षण संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में जाटों समेत पांच जातियों को आरक्षण का लाभ बंद कर दिया है। सरकार के इस फैसले से
आरक्षण के लिए लड़ाई लड़ रहे जाट समुदाय का आक्रोश भड़कने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। राज्य के मुख्य सचिव की ओर से आरक्षण का लाभ तुरंत प्रभाव से बंद करने संबंधी परिपत्र उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, औद्योगिक प्रशिक्षण एवं कृषि विभाग के प्रशासनिक सचिवों तथा प्रधान सचिवों को भिजवा दिया गया है। पिछली हुड्डा सरकार ने जाट, रोड, बिश्नोई, त्यागी और जट सिख को सरकारी नौकरियों व शिक्षण संस्थानों में दस प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था। विशेष पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष केसी गुप्ता की सिफारिशों के आधार पर हुड्डा सरकार ने आरक्षण की व्यवस्था की थी, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने 27 जुलाई 2015 को हरियाणा सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि जब सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण रद कर दिया है तो प्रदेश सरकार कैसे यहां आरक्षण का लाभ दे रही है। हाईकोर्ट की फटकार के बाद राज्य सरकार द्वारा आरक्षण की सुविधा बंद किए जाने से अब इन पांच जातियों को न तो दाखिलों में लाभ मिलेगा और न ही सरकारी नौकरियों में दस प्रतिशत आरक्षण का लाभ उठा सकेंगे। राज्य सरकार ने प्रशासनिक सचिवों व प्रधान सचिवों को भेजे परिपत्र में कहा है कि सभी संस्थानों में दस प्रतिशत सीटें खाली रखी जाएं और 90 प्रतिशत सीटों पर ही दाखिले किए जाएं।राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़ : हाईकोर्ट की फटकार के बाद हरियाणा सरकार ने शिक्षण संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में जाटों समेत पांच जातियों को आरक्षण का लाभ बंद कर दिया है। सरकार के इस फैसले से आरक्षण के लिए लड़ाई लड़ रहे जाट समुदाय का आक्रोश भड़कने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। 1राज्य के मुख्य सचिव की ओर से आरक्षण का लाभ तुरंत प्रभाव से बंद करने संबंधी परिपत्र उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, औद्योगिक प्रशिक्षण एवं कृषि विभाग के प्रशासनिक सचिवों तथा प्रधान सचिवों को भिजवा दिया गया है। पिछली हुड्डा सरकार ने जाट, रोड, बिश्नोई, त्यागी और जट सिख को सरकारी नौकरियों व शिक्षण संस्थानों में दस प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था। विशेष पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष केसी गुप्ता की सिफारिशों के आधार पर हुड्डा सरकार ने आरक्षण की व्यवस्था की थी, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने 27 जुलाई 2015 को हरियाणा सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि जब सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण रद कर दिया है तो प्रदेश सरकार कैसे यहां आरक्षण का लाभ दे रही है। हाईकोर्ट की फटकार के बाद राज्य सरकार द्वारा आरक्षण की सुविधा बंद किए जाने से अब इन पांच जातियों को न तो दाखिलों में लाभ मिलेगा और न ही सरकारी नौकरियों में दस प्रतिशत आरक्षण का लाभ उठा सकेंगे। राज्य सरकार ने प्रशासनिक सचिवों व प्रधान सचिवों को भेजे परिपत्र में कहा है कि सभी संस्थानों में दस प्रतिशत सीटें खाली रखी जाएं और 90 प्रतिशत सीटों पर ही दाखिले किए जाएं।![]() |
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