एजुसेट से लगी सवा छह करोड़ की चपत

प्राथमिक शिक्षा विभाग में एजुसेट सिस्टम के नाम पर करीब सवा छह करोड़ रुपये की चपल लगाई जा चुकी है। अॅाडिट विभाग ने इस मामले में आब्जेक्शन लगाकर इसकी भरपाई करने के लिए सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को ऑडिट रिपोर्ट भेज दी है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश में प्राइमरी शिक्षा विभाग के एजुसेट सिस्टम की ऑडिट की गई थी। इस ऑडिट के दौरान पाया कि सन 2007 से लेकर नवंबर 2009 तक 75 एजुसेट उपकरण चोरी हुए थे। इससे विभाग को 45.38 लाख रुपये का नुकसान हुआ था, लेकिन आज तक विभाग के अधिकारियों ने न तो किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय की है और न ही इस नुकसान की भरपाई के लिए कोई प्रयास किया। इसी प्रकार प्रदेश के एक जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी व 17 बीईओ ने प्रदेश के दसवीं या बारहवीं कक्षा तक के 61 स्कूलों में चौकीदारों की नियुक्ति कर दी और चौकीदार का खर्चा प्राथमिक शिक्षा विभाग के खाते में डाल दिया गया। इससे विभाग को 7 लाख 96 हजार 297 रुपये का नुकसान हुआ है। यमुनानगर के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने 19, बेरी के बीईओ ने 4, सांपला के बीईओ ने 13, पटौदी के बीईओ ने 7 व गुड़गांव के बीईओ ने 18 चौकीदारों की नियुक्ति की थी। इतना ही नहीं प्रदेश के 13 बीईओ ने 460 चौकीदारों की नियुक्ति बगैर सेवा शर्ते तय किए और सरकारी स्वीकृति के बगैर कर दी। इनमें मुंदलाना बीईओ ने 21, झज्जर बीईओ ने 25, महम बीईओ ने 27, सांपला बीईओ ने 13, रेवाड़ी में सर्वाधिक 103, खोल में 53, बावल में 72, नाहर में 38, बौंदकलां में 24, बाढ़ड़ा में 24, जींद में 15, नारनौल में 49, पटौदी में नौ चौकीदार लगाए गए। इससे विभाग को 84 लाख 89 हजार 210 रुपये का नुकसान हुआ है। चौकीदारों की नियुक्ति से विभाग को कुल 92 लाख 81 हजार 507 रुपये का नुकसान हुआ है। प्रदेश में 1502 एजुसेट में से 760 एजुसेट खराब पड़े हैं। इस कारण विभाग को 4 करोड़ 59 लाख 80 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। ऑडिट से खुलासा हुआ है कि विभाग के अधिकारियों ने पंजाब वित्तीय नियमावली नियम 15.1 के अनुसार सरकारी सामान की देखरेख व रखरखाव में सर्तकता नहीं बरती है और न ही इसके लिए किसी की जिम्मेदारी तय की है। ब्याज राशि का प्रयोग कर रेवाड़ी व भिवानी में 12 लाख से अधिक का नुकसान किया। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार रेवाड़ी में 10 लाख 52 हजार 173 रुपये और भिवानी में 1 लाख 75 हजार 6 रुपये की ब्याज राशि का दुरुपयोग किया गया है। प्राइमरी शिक्षा विभाग के उपनिदेशक आरपी सांगवान का कहना था कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। वे कुछ भी नहीं कह सकते हैं।

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