एमडीयू ने प्रवेश की अंतिम तिथि बढ़ाई
एमडीयू के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय (डीडीई) ने आईटी?प्रबंधन (मैनेजमेंट) समेत अन्य सेमेस्टर प्रणाली आधारित पाठ्यक्रमों में पहले से रजिस्टर्ड प्रवेश प्राप्त अ?यर्थियों के लिए एडमिशन लेने की आखिरी तारीख 5 जुलाई कर दी है। ये प्रवेश 1,000 रुपए के विलंब शुल्क के साथ होंगे। इस विस्तारित प्रवेश तिथि के तहत कोई नया प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इतना ही नहीं अ?यर्थियों को लेटरल एंट्री के तहत प्रवेश दिया जाएगा। इस पर अधिक जानकारी एमडीयू की डीडीई वेबसाइट www.mdudde.net से प्राप्त की जा सकती है।
भारतीय खाद्य निगम में होंगी भर्तियां
सार्वजनिक क्षेत्र के महत्वपूर्ण पीएसयू भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने आठ श्रेणियों में कुल 460 मैनेजमेंट ट्रेनी (एमटी) पदों पर भर्ती की घोषणा की है। ये नियुक्तियां देश में एफसीआई की विभिन्न शाखाओं में होंगी। भर्ती होने के छह महीने बाद एमटी को मैनेजर का पद दिया जाएगा। इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया दो जुलाई से शुरू होगी। मैनेजमेंट ट्रेनी की नियुक्ति जिन आठ श्रेणियों में होगी उनके नाम हैं जनरल, डिपो, मूवमेंट, टेक्निकल, अकाउंट्स, सिविल इंजीनियरिंग, मेकेनिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल
इंजीनियरिंग। इन सभी के लिए शैक्षणिक योग्यता संबंधी अर्हता अलग?अलग है, लेकिन आयु की अधिकतम सीमा 28 साल है। मसलन जनरल, डिपो और मूवमेंट श्रेणी में नियुक्ति पाने के लिए 60 फीसदी अंकों के साथ बैचलर डिग्री या सीए/आईसीड?ल्यूए/सीएस होना जरूरी है। इसी तरह सिविल, मेकेनिकल या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग श्रेणी में आवेदन के लिए संबंधित विषय में बीई/बीटेक डिग्री आवश्यक है। सभी पदों के लिए उपयुक्त उ?मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा, ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू के आधार पर होगा। आवेदन के लिए शुल्क 550 रुपए रखा गया है। आवेदन 2 जुलाई से शुरू होंगे और 31 जुलाई इसके लिए अंतिम तिथि है।
सांस्कृतिक महत्व की पढ़ाई होगी सीबीएसई में
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) नए सत्र से भारतीय संस्कृति पर आधारित चयनात्मक पाठ्यक्रम नॉलेज ट्रेडिशंस एंड प्रैक्टिसेस ऑफ इंडिया को शामिल करने जा रहा है। यह कोर्स 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए होगा। इस पाठ्यक्रम को शामिल करने का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और स?यता पर बनी पौराणिक कहानियों, वेद?उपनिषद में दिए गए तर्कों के आधार पर छात्रों को नैतिक शिक्षा देना व उनमें जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है। बोर्ड का मानना है कि तर्कों के माध्यम से छात्रों को नैतिक शिक्षा का पाठ आसानी से पढ़ाया जा सकता है। कोर्स में जो पाठ शामिल किए गए हैं वे विज्ञान और मानवीयता दोनों से जुड़े हुए हैं। दोनों ही विषयों को विद्यालयों के ही शिक्षक पढ़ाएंगे। इस कोर्स के सभी मॉड्यूल्स में जो भी अ?यास और गतिविधियां शामिल की गई हैं वे ऐसी हैं जिनमें पारंपरिक स्वतंत्रता को छात्र इस दौर की परिस्थितियों से जोड़कर सीख सकें। संस्कृति से जुड़ी मिसालें और किस्से?कहानियां, जो बचपन में घर के बुजुर्ग बच्चों को नैतिक शिक्षा देने के लिए सुनाते थे, उन्हें आज के दौर से जोड़ते हुए प्रासंगिक बनाएंगे। कई बातें ऐसी हैं जो सालों पहले लिखे गए वेद?पुराणों में हैं, लेकिन नई पीढ़ी को उनकी जानकारी ही नहीं है। इस पाठ्यक्रम में उन बातों का जिक्र भी होगा। बोर्ड का मानना है कि युवा पीढ़ी का विश्वास वैज्ञानिक दृष्टिकोण में ज्यादा है, इसलिए उन्हें इसी अंदाज में पुराने रीति?रिवाजों को पढ़ाया जाएगा।
आईआईटी में होगी चिकित्सा की पढ़ाई
आईआईटी खडगपुर अपने परिसर में आधुनिक सुविधाओं युक्त अस्पताल खोलने जा रहा है। इसके लिए करीब 250 करोड़ रुपए निवेश किए जाएंगे। अस्पताल के साथ?साथ यहां छात्रों को चिकित्सा में स्नातक स्तरीय कोर्स भी कराया जाएगा। यानी देश के शीर्ष प्रौद्योगिकी संस्थान में अब मेडिकल की भी पढ़ाई शुरू होने वाली है। अनुमान है कि 2016 से यहां चिकित्सा के स्नातक स्तरीय पाठ्यक्रम की पढ़ाई शुरू हो जाएगी। इस पाठ्यक्रम को भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) से मान्यता मिलेगी। ऐसा पहली बार हो रहा है कि कोई भी आईआईटी संस्थान अब चिकित्सा शिक्षा का हिस्सा बनने जा रहा है। चिकितसा की पढ़ाई शुरू करने के लिए आईआईटी खडगपुर को पहले ही केंद्र की ओर से स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अलावा केंद्र की ओर से इसके लिए धन की व्यवस्था भी करा दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक आईआईटी खडगपुर देश का पहला प्रौद्योगिकी संस्थान होगा, जहां इंजीनियरिंग के साथ?साथ मेडिकल की भी पढ़ाई होगी। इस सिलसिले में आईआईटी खडगपुर परिसर के अंदर करीब 45 एकड़ जमीन अस्पताल के लिए आवंटित की गई है। जल्द ही इस परियोजना के लिए अभिरुचि पत्र आमंत्रित किया जाएगा। अगले तीन महीने में इसका निर्माण कार्य शुरू होने का अनुमान है। हालांकि संस्थान चिकित्सा जैव प्रौद्योगिकी में स्नातको?ार पाठ्यक्रम चला रहा है, लेकिन चिकित्सा क्षेत्र के लिए इतना ही पर्याप्त नहीं है और एकीकृत चिकित्सा पाठ्यक्रम उपल?ध कराने की दिशा में सोचा जा रहा है।
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