खर्च घटाने के लिए सरकार.........


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खर्च घटाने के लिए केंद्र सरकार में एक साल तक नियुक्ति पर रोक लगी
** सरकार ने घाटा कम करने के लिए कई उपायों की घोषणा की 
** सरकारी विभागों की बैठकें फाइव स्टार होटलों में नहीं होंगी 
** अफसरों की फर्स्ट क्लास एयर टिकट पर भी रोक 
नई दिल्ली : केंद्र सरकार के विभागों में एक साल तक कोई नई नियुक्ति नहीं होगी। अगर कोई पद एक साल से खाली पड़ा है, तो उसे भी नहीं भरा जाएगा। वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों को इस आशय का निर्देश भेजा है। 
निर्देश तत्काल प्रभावी हो गया है। ये बस सरकारी घाटा कम करने के लिए किया जा रहा है। यूपीए सरकार ने भी 2012 और 2013 में घाटा कम करने के लिए ऐसे उपाय किए थे। पिछले साल 18 सितंबर को इस तरह का आदेश जारी किया गया था। इन उपायों के जरिए सरकार का इरादा गैर-योजना खर्च 10 फीसदी कम करना है। विदेश यात्रा में वरिष्ठ अफसरों के लिए फर्स्ट क्लास एयर टिकट पर रोक लगा दी गई है। कोई बैठक फाइव स्टार होटल में नहीं होगी। जहां संभव हो, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के इस्तेमाल की हिदायत दी गई है।
ऐसे की जाएगी बचत
नए वाहन :
खरीदपर रोक। सेना सुरक्षा बलों पर लागू नहीं।
कॉन्फ्रेंस-सेमिनार :
बहुत जरूरी होने पर ही ऐसे आयोजन हों। विदेश में आयोजन सिर्फ ट्रेड प्रमोशन के लिए। फाइव-स्टार होटलों में बैठक सिर्फ विदेशी प्रतिनिधियों के साथ।
विमान यात्रा :
वरिष्ठताके हिसाब से अधिकारी अलग-अलग क्लास में यात्रा कर सकेंगे। लेकिन सबसे सस्ता उपलब्ध टिकट लेना होगा। पति या पत्नी के लिए फ्री टिकट बंद।
विदेश यात्रा:
फर्स्टक्लास में बुकिंग नहीं होगी। विदेश यात्रा के लिए पीएमओ की मंजूरी जरूरी। फर्स्ट क्लास में यात्रा पर बैन से लंबी दूरी के उड़ानों पर दो लाख रुपए तक की बचत होगी।
नौकरी :
सभी विभागों में नई नियुक्तियों पर रोक। पुराने पद एक साल से खाली पड़े हैं तो उन पर भी नियुक्ति नहीं। विशेष परिस्थितियों में वित्त मंत्रालय की इजाजत लेनी होगी।
नहीं होगा मार्च लूट, सचिव रखेंगे नजर
निर्देश के मुताबिक, अगर साल की पहली तीन तिमाही में आवंटित बजट कम खर्च हुआ है तो आखिरी तिमाही में उसे पूरा करने की कोशिश नहीं की जाएगी। सालाना बजट के एक तिहाई से ज्यादा आखिरी तिमाही में खर्च नहीं होगा। मार्च में साल के बजट का अधिकतम 15 फीसदी खर्च किया जा सकेगा। इन उपायों पर अमल की जिम्मेदारी सचिवों पर होगी। वे इस पर पूरी तरह से नजर रखेंगे।
सरकारी घाटा कम करने की कवायद
इस साल 4.1 फीसदी और 2016-17 तक 3 फीसदी पर लाने का लक्ष्य है। 2011-12 में यह 5.7 फीसदी तक पहुंच गया था। 2012-13 में 4.8 और 2013-14 में 4.5 फीसदी पर था। इस साल योजना खर्च 5.75 लाख करोड़ और गैर-योजना खर्च 12.19 लाख करोड़ का प्रावधान है। कुल खर्च 17.94 लाख करोड़ का अनुमान है। पिछले साल यह 15.90 करोड़ था।
कितनी होगी बचत:
जापानी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का अनुमान है कि इन उपायों से 40,000 करोड़ रुपए तक की बचत होगी। यह जीडीपी का 0.3 फीसदी है। हालांकि उसका कहना है कि इससे विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
इन पर निर्देश लागू
सरकारसे मदद लेने वाली स्वायत्त संस्थाओं पर भी ये उपाय लागू होंगे। लेकिन रक्षा, अर्धसैनिक बल, वेतन और पेंशन, राज्यों को मिलने वाले ग्रांट आदि पर ये उपाय लागू नहीं होंगे। इसके अलावा अन्य पर ये व्यवस्था लागू रहेगी और इन्हें कड़ाई से लागू किया जाएगा।

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