HTET thumb impression during exam by machine

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परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने से पहले देना होगा थंब इम्प्रेशन
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बलवान शर्मा, भिवानी
इस बार हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा में उम्मीदवारों को परीक्षा के दौरान ही थंब इम्प्रेशन देना होगा। 2009 व 2010
में एचटेट के दौरान हुई गड़बड़ियों को रोकने के लिए इस बार क्राइम ब्रांच की सलाह पर हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने यह
नया कदम उठाया है। इसके साथ ही सभी परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल जैमर लगाए जाएंगे, जो किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक
डिवाइस के परीक्षा केंद्र में घुसने पर अंकुश लगाने का कार्य करेगा। सूत्र बताते हैं कि इस बार हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड
प्रशासन ने हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा में सुरक्षा के कड़े प्रबंध करने की तैयारी की है। इसी के तहत परीक्षा केंद्र के मुख्य
द्वार पर ही थंब इम्प्रेशन मशीन में अंगूठा लगाना होगा। शिक्षा  के इस प्रयास के बाद प्रदेश के करीब 4 लाख 60 हजार
उम्मीदवारों के अंगूठों के निशान शुरू में ही इलेक्ट्रानिक डिवाइस में रिकार्ड हो जाएंगे। भविष्य में यदि कोई जांच करनी पड़ी तो बोर्ड प्रशासन को एचटेट 2015 का पूरा रिकार्ड खंगालने की कता नहीं होगी, बल्कि थंब इम्प्रेशन के रिकार्ड को ही जांच
अथॉरिटी को उपलब्ध करवा दिया जाएगा। इस रिकार्ड के पर जांच भी आसानी से हो सकेगी। लगभग 4 लाख 60 हजार उम्मीदवारों का रिकार्ड होगा तैयार इस बार हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित की जा रही पात्रता परीक्षा में 4 लाख 49 हजार उम्मीदवारों के आवेदन फार्म तो स्वीकृत किए जा चुके हैं, जबकि करीब साढ़े 11 हजार उम्मीदवारों को दो दिन का मौका फीस कन्फर्मेशन के लिए दिया हुआ है। यदि इन सभी उम्मीदवारों के आवेदन भी कार हो पाए तो यह संख्या बढ़कर 4 लाख 60 हजार के पास पहुंच जाएगी। बोर्ड प्रशासन ने इसके लिए थंब इम्प्रेशन मशीन मधुबन इम ब्रांच के सहयोग से बाहर से हायर (मंगवाने) की तैयारी शुरू कर दी है, ताकि परीक्षा के दिन कोई परेशानी न हो।  मोबाइल व इलेक्ट्रानिक डिवाइस के प्रवेश पर लगाई जाएगी पाबंदी  किया है,ताकि कोई भी उम्मीदवार परीक्षा केंद्र में मोबाइल लेकर प्रवेश न कर सके।


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जाट आरक्षण पर याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछाकेंद्र में जाटों को आरक्षण रद, तो राज्य में कैसे लागू

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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राज्य में जाटों एवं अन्य पांच जातियों को आरक्षण दिएजाने के मामले में सुनवाई के दौरान सोमवार को पंजाब-
हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि जब सुप्रीमकोर्ट ने केंद्र में जाट आरक्षण के फैसले को निरस्त कर दिया है तो
हरियाणा में इसे किस आधार पर लागू रखा जा रहा है। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से 20 जुलाई को मामले की अगली सुनवाई परजवाब देने को कहा है।सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के समक्षसुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें पिछले सालयूपीए सरकार द्वारा लागू किए गए जाट आरक्षण को रद करदिया गया था। अदालत ने इसे रिकॉर्ड में लेते हुए प्रतिवादी से सवाल पूछ लिया है। उल्लेखनीय है कि हरियाणा की पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार ने प्रदेश में जाट, बिश्नोई, जाट सिख, रोड और त्यागी जातियों को स्पेशल बैकवर्ड क्लास के तहत दस फीसदी आरक्षण दिए जाने का फैसला किया था। सरकार के इसी फैसले को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। तत्कालीन सरकार की ओर से अपने फैसले को मजबूत आधार देते हुएमहर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) और सेंटर फॉर रूरल इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट चंडीगढ़ (क्रीड) द्वारा जाट समुदाय समेत सभी चार अन्य जातियों को आरक्षण देने के लिए सर्वे कराया गया था। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा था कि सर्वे में जाट समुदाय समेत चार अन्य जातियों के सामाजिक व आर्थिक स्तर के गलत आंकड़े पेश किए गए, जिनके आधार पर हरियाणा सरकार ने इन्हें ओबीसी श्रेणी में आरक्षण दिया है। इन राज्यों में दिया था आरक्षण यूपीए सरकार ने 4 मार्च, 2014 को दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हिमाचल, बिहार, मध्य प्रदेश, और हरियाणा के अलावा
राजस्थान (भरतपुर और धौलपुर) के जाटों को केंद्रीय सूची में शामिल किया था। प्रदेश में जाटों को नौकरी में आरक्षण के मामले में सरकार से जवाब तलब . 17 मार्च को केंद्र ने रद किया था आरक्षण सुप्रीम कोर्ट ने गत 17 मार्च को एक अहम फैसले में केंद्र में जाट आरक्षण को रद कर दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि  जाट सामाजिक और आर्थिक रूप से सक्षम हैं और उन्हें आरक्षण की कोई जरूरत नहीं है। गौरतलब है कि केंद्र में जाटों को आरक्षण यूपीए सरकार ने इसे लागू किया था और मोदी सरकार ने भी इसे जारी रखा था।
हरियाणा में 70 लाख जाट
प्रदेश के आंकड़ों पर नजर डाले तो करीब 70 लाख जाट समुदाय की आबादी हैं। इसमें हिसार के अलावा भिवानी, जींद, रोहतक, 

सोनीपत, कुरूक्षेत्र आदि में ज्यादा जाट समुदाय के लोग हैं। 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण याचिकाकर्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी राज्य में आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, लेकिन हरियाणा सरकार ने न केवल जाट, बिश्नोई, जटसिख, रोड और त्यागी समुदाय को दस फीसदी स्पेशल बैकवर्ड क्लास में आरक्षण दे दिया बल्कि आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों को भी दस फीसदी आरक्षण दे दिया गया, जिससे प्रदेश
में आरक्षण की सीमा 50 से बढ़कर 70 फीसदी हो 

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