promotion matter Headmaster to principal,no case on private university


मुख्याध्यापकों को करना होगा इंतजार

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राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़ : सरकारी स्कूलों में तैनात मुख्याध्यापकों  प्रिंसिपल बनने के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा। प्रमोशन
कोटे से भरे जाने वाले स्कूल प्रिंसिपल के पदों के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों ने शिक्षा निदेशालय को अभी पूरा रिकॉर्ड ही नहीं भेजा है। निदेशालय की ओर से जारी संभावित वरिष्ठता सूची पर आपत्तियां भी नहीं आई हैं। इससे प्रमोशन सूची जारी होने में अभी समय लगेगा। निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, डाइट प्रिंसिपल और राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं
प्रशिक्षण परिषद को प्रोन्नति के लिए पात्र हेडमास्टर का रिकॉर्ड जल्द भेजने के लिए स्मरण पत्र जारी किया है।1सेकेंडरी
शिक्षा विभाग के अतिरिक्त निदेशक प्रशासन वीरेंद्र सिंह सहरावत ने सभी अधिकारियों को 15 तक हर हाल में पात्र मुख्याध्यापकों का रिकॉर्ड भेजने का निर्देश दिया है। इसके बादसंभावित वरिष्ठता सूची पर निदेशालय आपत्तियां नहीं लेगा। 1मुख्याध्यापकों को संभावित वरिष्ठता सूची में भेदभाव के विरुद्ध शिकायत पूरा तर्कसंगत रिकॉर्ड साथ लगाकर करनी होगी। सहरावत के अनुसार 30 जून तक इस काम को अंजाम दिया जाना था, लेकिन सूची अभी तक नहीं मिली है। निदेशालय को इसे देखते हुए 15 जुलाई अंतिम तिथि घोषित करनी पड़ी। बता दें कि पहली जून 2015 को कट ऑफ तारीख मानते हुए 1312 हेडमास्टर की संभावित सूची 22 जून को जारी की जा चुकी है।

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प्राइवेट यूनिवर्सिटी पर केस नहीं, अब यूजीसी को दी शिकायत

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- आरटीआइ कार्यकर्ता ने स्टडी सेंटर की डिग्रियां रद करने की मंाग
जागरण संवाददाता, सिरसा: पंजाब की लवली यूनिवर्सिटी के सिरसा में खुले स्टडी सेंटरों के खिलाफ वर्ष 2008 से लड़ाई लड़ रहे आरटीआइ कार्यकर्ता ने जिला प्रशासन द्वारा यूनिवर्सिटी प्रबंधन के खिलाफ केस दर्ज न करने पर यूजीसी के चेयरमैन को पत्र लिखा है। साथ ही नियम विरुद्ध सिरसा में बने स्टडी सेंटर की डिग्रियों को रद करने की मांग रखी है। लवली यूनिवर्सिटी की ओर से वर्ष 2008 में सिरसा में स्टडी सेंटर खोला गया था। यूजीसी के नियमों के अनुसार प्राइवेट यूनिवर्सिटी राज्य से बाहर स्टडी सेंटर नहीं दे सकती और यह नियम विरुद्ध है। इसकी शिकायत उन्होंने मुख्य सचिव व उच्चतर शिक्षा निदेशक को की। जिसके बाद स्टडी सेंटर को बंद करने की कार्रवाई हुई। वर्ष 2012 में फिर स्टडी सेंटर खुले और उन्होंने फिर इसकी
शिकायत की। 2014 में फिर यूनिवर्सिटी ने स्टडी सेंटर खोल दिये। उन्होंने फिर इसकी शिकायत कर दी।
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एफआइआर के आदेश, हुआ कुछ नहीं
करतार सिंह ने बताया कि वे गत 8 व 16 जनवरी को विभाग के निदेशक से मिला और उसके बाद इस मामले में यूनिवर्सिटी के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवाने के लिए उपायुक्त को पत्र लिख दिया गया। उपायुक्त ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। बाद में यह मामला सीएम विंडो पहुंचा जिसके जवाब में उपायुक्त ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने स्टडी सेंटर बंद कर दिये हैं इसलिए एफआइआर की आवश्यकता नहीं है। करतार सिंह का आरोप है कि हरियाणा सरकार के नियमानुसार एफआइआर होने के बाद राज्य सरकार यूनिवर्सिटी से डेढ़ करोड़ जुर्माने के रूप में ले सकती थी लेकिन एफआइआर न होने के कारण सरकार को डेढ़ करोड़ का नुकसान हुआ है।
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यूजीसी रद करे डिग्री
करतार सिंह ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत प्रदेश के मुख्य सचिव के साथ यूजीसी चेयरमैन को की है। उनसे मांग की है कि स्टडी सेंटर के माध्यम से डिग्री लेने वाले विद्यार्थियों की डिग्री रद होनी चाहिए।



ब्राह्मणआरक्षण संघर्ष समिति आंदोलन करने का ऐलान

ब्राह्मणआरक्षण संघर्ष समिति ने केंद्र में आरक्षण की मांग को लेकर अगस्त में आंदोलन करने का ऐलान किया है। समिति का कहना है कि जब प्रदेश में सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर दस प्रतिशत आरक्षण मिल सकता है तो केंद्र में क्यों नहीं। 
जंतर-मंतर पर बीस अगस्त के बाद समिति के प्रदेशाध्यक्ष हरिराम दीक्षित, जिला पानीपत के प्रधान रामकुमार शर्मा और गजानंद कौशिक नारनौल आमरण अनशन पर बैठेंगे। धरने में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, बिहार, झारखंड, यूपी, दिल्ली, उत्तराखंड राज्यों के लोग हिस्सा लेंगे। नौ राज्यों में समिति के साथ सात हजार सदस्य जुड़ चुके हैं। सर्व कौशिक खाप ने ब्राह्मण आरक्षण संघर्ष समिति को समर्थन किया। प्रधान तेलूराम कौशिक ने कहा कि समिति के सदस्यों का हरसंभव सहयोग किया जाएगा।

                              केंद्रमें आरक्षण की मांग को लेकर ब्राह्मण आरक्षण सघर्ष समिति के सदस्य प्रदेशभर में दौरा कर रहे हैं। रविवार को कैथल पहुंचे।

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