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सर्विस टैक्स जमा नहीं किया तो होंगे गिरफ्तार


नई दिल्ली। सर्विस टैक्स बकायेदारों के लिए बुरी खबर है। टैक्स जमा नहीं करने वालों की अब गिरफ्तारी की जा सकती है और उन्हें सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है। पिछले सप्ताह वित्त विधेयक 2013 के पास होने के साथ ही राजस्व विभाग के अधिकारी अब कलेक्शन किए गए सर्विस टैक्स का भुगतान नहीं करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकते हैं।
अभी तक अधिकारियों को सर्विस टैक्स चोरी के मामले में गिरफ्तारी का अधिकार नहीं था। इसके अलावा सर्विस टैक्स जमा न कराने वाली कंपनी के डायरेक्टर और मैनेजर को भी गिरफ्तार किया जा सकता है। साथ ही उन्हें 7 साल तक की सजा भी हो सकती है और एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यह पहली बार है जब सर्विस टैक्स नियमों में संशोधन कर सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क की तर्ज पर आपराधिक प्रक्रिया संहिता जोड़ी गई है। इस साल के वित्त बिल में जोड़ी गई धारा 91 के तहत जुटाए गए सर्विस टैक्स को जमा न करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार मिल गया है। हालांकि ऐसे मामलों में गिरफ्तारी केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधीक्षक के स्तर के अधिकारी ही कर सकेंगे। यह बिल 10 मई को पारित हुआ है। इसमें सर्विस टैक्स अदा न करने वाले और सरकार से रजिस्ट्रेशन नंबर लेने में विफल रहने वाले व्यक्ति या कंपनी पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है। एजेंसी
• वित्त बिल 2013 के पारित होने के साथ ही सरकार को मिली शक्ति
- 7 साल तक की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माने का भी प्रावधान

रेडिएशन के नियम लागू करने को लेकर सख्त होगी सरकार अब मोबाइल हैंडसेट बताएगा कितना है खतरा


•धीरज कनोजिया
नई दिल्ली। मोबाइल हैंडसेट से निकलने वाली सेहत के लिए खतरनाक रेडिएशन किरणों को लेकर सरकार अब नींद से जागती दिख रही है। खासकर तय सीमा से अधिक रेडिएशन छोड़ने वाले हैंडसेटों पर सरकार सख्ती के मूड में है। सबसे पहले सरकार नियमों की अनदेखी कर रही कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए खुद को मजबूत बनाने की तैयारी में है।
इसके तहत दूरसंचार विभाग अपनी टेलीकॉम एनफोर्समेंट रिसॉर्स एंड मॉनीटरिंग (टीईआरएम यानी टर्म) इकाई को ताकत देने की कोशिश में है। ज्यादा रेडिएशन छोड़ने वाले हैंडसेटों की तलाशी और छापे मारने की ताकत देने की बात चल रही है। सरकार के निर्देश के तहत अब जल्द ही उपभोक्ता अपने नए हैंडसेट पर *#07# डायल कर रेडिएशन का स्तर जान सकेंगे। नोकिया और सैमसंग ने अपने नए मोबाइल हैंडसेट पर यह सेवा शुरू करने की बात कही है।
दूरसंचार विभाग उन आयातित मोबाइल हैंडसेटों पर रोक लगाने के लिए तैयार है, जिन पर रेडिएशन उत्सर्जन का स्तर नहीं दर्शाया गया है। विभाग का कहना है कि हैंडसेट की पैकेजिंग पर उत्सर्जन स्तर लिखा होना चाहिए। इसके अलावा दूरसंचार विभाग में यह बात काफी लंबे समय से चल रही है कि वे रेडिएशन स्तर का पता लगाने वाली इकाई टर्म को शक्तियां दें। इसके तहत वे बाजार या फिर कंपनियों के पास से तय सीमा का उल्लंघन करने वाले हैंडसेटों को जब्त करें। अभी तक टर्म के पास ऐसी ताकत नहीं है। इसके लिए टेलीग्राफ अधिनियम में संशोधन कराने की बात है।
दूसरी तरफ सरकार के निर्देश के अनुसार नए मोबाइल हैंडसेट में *#07# डायल कर रेडिएशन का स्तर पता लगाने का प्रस्ताव है। अभी *#07# डायल कर हैंडसेट का पहचान नंबर यानी आईएमईआई नंबर का पता लगाया जाता है। आईएमईआई नंबर से मोबाइल फोन ग्राहक का पता-ठिकाना खोजा जा सकता है।
विभाग के मुताबिक अब *#07# डायल कर अगर रेडिएशन तय स्तर से ज्यादा पाया जाता है तो इसकी शिकायत विभाग से की जा सकती है। नोकिया और सैमसंग अपने नए हैंडसेट में यह सुविधा देने की बात कर रहे हैं। अभी मोबाइल हैंडसेट कंपनियों का रेडिएशन यानी एसएआर स्तर 1.6 वाट प्रति किलोग्राम है। एसएआर यानी स्पेशीफिक एर्ब्सोपशन रेट वह दर होती है, जो बताती है कि आखिर हमारा शरीर कितनी मात्रा में रेडिएशन किरणों को ग्रहण कर सकता है। देश में पहले एक व्यक्ति के लिए रेडिएशन एसएआर स्तर छह मिनट के अंदर दो वाट प्रति किलोग्राम था, जिसे पिछले साल घटाकर 1.6 वाट प्रति किलोग्राम कर दिया गया।
•नए हैंडसेट में मिलेगी सुविधा, करना होगा *#07# डायल
•नोकिया और सैमसंग कंपनी ने की इसकी शुरुआत
•ज्यादा रेडिएशन वाले हैंडसेट की तलाशी और छापा मारने का अधिकार पाने की तैयारी

बीएड फर्जीवाड़े की चार्जशीट कोर्ट में पेश


शिमला। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बीएड प्रमाणपत्र फर्जीवाडे़ में सीबीआई जांच पूरी कर ली है। ब्यूरो ने संबंधित चार्जशीट को कोर्ट में पेश कर दिया है। अब कोर्ट में जिला कांगड़ा के ढलियारा कॉलेज निदेशक राजेश ठाकुर, बिहार निवासी डिलेश कुमार, फर्जी प्रमाणपत्र हासिल करने के आरोपी यशवीर, अनुज, वीरेंद्र सिंह और किरण कुमारी के खिलाफ मुकदमा शुरू हो गया है। सीबीआई के पुलिस अधीक्षक आर. उपासक ने इसकी पुष्टि की है।
हाईकोर्ट के आदेश पर ही यह मामला सीबीआई में दर्ज हुआ था। राजेश ठाकुर पर आरोप हैं कि उन्होंने बिहार निवासी डिलेश कुमार की मदद लेते हुए अपने संबंधियों के फर्जी प्रमाणपत्र बना लिए। ये दोनों लगभग तीन महीने तक न्यायिक हिरासत में भी रह चुके हैं। इस संबंध में सीबीआई ने आईपीसी की धारा 420, 467 और 461 के तहत जांच पूरी करने के बाद चार्जशीट तैयार की है, जिसके बाद अब इस पर चालान कोर्ट में पेश कर दिया गया है। सीबीआई के पुलिस अधीक्षक आर. उपासक ने बताया कि जांच में यह पाया गया है कि राजेश ठाकुर ने डिलेश कुमार की मदद लेकर अपने भाई यशवीर, अनुज, वीरेंद्र सिंह और किरण कुमारी के फर्जी प्रमाणपत्र बना लिए। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर कुछ ने नौकरी भी पा ली। ये प्रमाणपत्र मगध विश्वविद्यालय के बनाए गए हैं।
छानबीन में जब इनकी असलियत पता की गई, तो ये जाली पाए गए हैं। इनका वांछित रिकार्ड नहीं मिल पाया है। हाईकोर्ट से सीबीआई को मामला मिलने के बाद इसकी गंभीरता से जांच की गई। अब इसका चालान कोर्ट में पेश कर मुकदमा शुरू हो गया है।
•सीबीआई की जांच पूरी कॉलेज निदेशक समेत 6 पर मुकदमा शुरू
रिश्तेदारों के जाली प्रमाणपत्र बनाने के आरोप
हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई कर रही जांच
मगध विवि के नाम पर बनवाए जाली सर्टिफिकेट

कर्मचारियों की भर्ती को नए मानदंड स्थापित


चंडीगढ़ (ब्‍यूरो)। हरियाणा सरकार ने हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) के पद पर कर्मचारियों की भर्ती करने के मानदंड निर्धारित किए हैं। सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि नए मानदंड के अनुसार विभाग द्वारा अब सेवा रिकार्ड की जांच, प्रासंगिक अनुभव, शैक्षणिक उपलब्धि और अन्य उपलब्धियाें के आधार पर उम्मीदवार का मूल्यांकन किया जाएगा। विभाग सेवा रिकार्ड, अनुभव, शैक्षणिक उपलब्धि और अन्य व्यवसायिक उपलब्धियों के आधार पर अधिकतम 100 अंकों में से अंक प्रदान करेंगे। एचसीएस नामांकन के तहत पिछले दस वर्ष की एसीआर में विशेष उल्लेख के सेवा रिकार्ड के लिए 70 प्रतिशत अधिमान या कुल 100 अंकों में से 70 अंक दिये जाएंगे। प्रासंगिक अनुभव शैक्षणिक उपलब्धियों और अन्य व्यवसायिक उपलब्धियों में प्रत्येक के लिए 10 प्रतिशत अधिमान या 10 अंक दिए जाएंगे। पिछले आठ वर्षों के दौरान उम्मीदवार की कम से कम छ: एसीआर ''वैरी गुड'' श्रेणी की होनी चाहिए और दो एसीआर ''गुड'' श्रेणी से नीचे की श्रेणी की नहीं होनी चाहिए।
गत आठ वर्षों के दौरान प्रत्येक एसीआर के लिए विभाग ''आउट स्टैंडिंग'' के लिए 8.75 अंक, ''वैरी गुड'' के लिए 7 अंक और ''गुड'' के लिए 5 अंक देगा। उन्होंने बताया कि विभागाें द्वारा मेधावी उम्मीदवाराें के नाम मुख्य सचिव को भेजे जाएंगे।

गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को बंद करने के नोटिस भेज


बवानी खेड़ा (भिवानी)। शिक्षा विभाग द्वारा गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची जारी करने के बाद से स्कूल संचालकों में हड़कंप मचा है और बच्चों के अभिभावक चिंतित हैं। सरकार की और से शैक्षणिक स्तर के क्षेत्र के लगभग 20 स्कूलों को बंद करने के फरमान जारी किए गए हैं।
स्कूलों में दो माह से नए सत्र की कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। वहीं निजी स्कूल संचालकों ने अभिभावकों को प्रलोभन देकर बच्चों का दाखिला करवाया था। अभिभावकों ने फीस जमा करवा दी लेकिन अब इन स्कूलों को नोटिस मिल गया है। इससे स्कूल संचालक और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।
निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि यह तो विभाग ने सरासर अन्याय किया है। अगर स्कूल बंद ही करने थे तो सत्र से पहले उन्हें नोटिस दिए जाते ताकि बच्चों व अभिभावकाें को परेशानियों का सामना न करना पड़ता।
अभिभावक संजय, नरेंद्रसिंह, महाबीर सिंह, समीर सिंह, प्रवीन पाहवा, रवि कदावला, अशोक संभ्रवाल, अनिल भुटानी, किरण, मनोज डुमड़ा, संजय डुमड़ा, सुरेश भारद्वाज, श्यामसुंदर आदि का कहना है कि एक तरफ तो सरकार शिक्षा क्षेत्र में बढ़ावा दे रही है।
दूसरी तरफ स्कूल बंद किए जा रहे हैं।
बीईईओ परमजीत कौर ने बताया कि बवानीखेड़ा क्षेत्र में लगभग 20 स्कूल गैर मान्यता प्राप्त हैं। इन्हें नोटिस जारी कर दिया गया है। विभाग के आदेशानुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
•स्कूल संचालकों में हड़कंप, अभिभावक परेशान

कॉलेजों मेें आई कार्ड से होगी एंट्री : भुक्कल


शिक्षामंत्री ने झज्जर में सुनीं लोगों की समस्याएं
• अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। शिक्षामंत्री गीता भुक्कल ने ने कहा कि अब प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में बाहरी शरारती तत्वों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए विद्यार्थियों और शिक्षकों के आई कार्ड बनाए जाएंगे। आई कार्ड के आधार पर ही महाविद्यालय के मुख्य गेट से प्रवेश दिया जाएगा। वे रविवार को झज्जर के लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में लोगों की समस्याएं सुनने के बाद पत्रकारों से बात कर रहीं थीं।
शिक्षामंत्री भुक्कल ने बताया कि जिस प्रकार राजकीय महाविद्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं उसी प्रकार आई कार्ड बनाने की योजना को भी मूर्त रूप दिया जा रहा है। जल्द ही विद्यार्थियों के आई कार्ड बनाकर वितरित कर दिए जाएंगे। उसके बाद बिना आई कार्ड के महाविद्यालय में प्रवेश निषेध रहेगा। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग का उद्देश्य बच्चों को सही और गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान करना है।
निजी स्कूलों की मान्यता को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में शिक्षामंत्री भुक्कल ने कहा कि जो निजी स्कूल कानून का पालन नहीं करते उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने अभिभावकों से आह्वान किया कि गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों में अपने बच्चों का दाखिला न कराएं। यदि दाखिला करा दिया है तो उन्हें वहां से हटवा कर निकटवर्ती राजकीय विद्यालयों में अथवा मान्यता प्राप्त विद्यालयों में प्रवेश दिलाएं।
अमर उजाला

स्कूल में पंद्रह महिला शिक्षकों की तैनाती

नरवाना (जींद)। शिक्षा विभाग ने जिले के एक गांव में नौंवी कक्षा की छात्रा से अध्यापक द्वारा दुराचार किए जाने के मामले से उपजे हालात पर नियंत्रण पाते हुए संबंधित राजकीय विद्यालय में स्टाफ को बदलते हुए पंद्रह महिला शिक्षकों की नियुक्ति कर दी है। इन नियुक्तियों के साथ ही अब सोमवार से स्कूल खुल जाएगा, जिसे ग्रामीणों ने दुराचार का मामला उजागर होने और अध्यापक की पिटाई के बाद से बंद कर रखा था। उनकी मांग थी कि स्कूल में महिला शिक्षिकों की नियुक्त की जाए, अन्यथा वे अपनी बच्चियों को स्कूल नहीं भेजेंगे।
शिक्षा विभाग द्वारा रविवार शाम को जींद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेजी गई सूची के मुताबिक, धरोदी से चांदकौर, सच्चाखेड़ा से प्रवीण रानी, दनौदा से दीपा, दनौदा कलां से सुदेश कुमारी, दबलैन से जयदेवी, धमतान साहिब से मनोज कुमारी, पीपलथा से हरदीप कौर, बेलरखा से बीरमती, दबलैन से राजेश कुमारी, दनौदा कलां से रीटा अग्रवाल व सरोज कुमारी, दनौदा खुर्द से बबीता को राजकीय विद्यालय में तैनात किया गया है। इसी परिसर में चल रहे राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला में बदौवाल से वीना भाटिया को मुख्याध्यापक, नरवाना से जेबीटी मनोज कुमारी व शीला देवी को तैनात करने आदेश भी जारी किए गए हैं।
तबादला करके भेजी गई सभी महिला टीचरों को सोमवार सुबह आठ बजे तक स्कूल पहुंचकर ज्वाइनिंग रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जींद को भेजने के लिए कहा गया है।
छात्रा से रेप की कड़ी निंदा
•छात्रा के रेप से गुस्साए ग्रामीणों की मांग मानी

मारुति के बर्खास्त कर्मियों पर भांजीं लाठिया


कई लोगों को आईं चोटें, कर्मचारी नेताओं को गिरफ्तार कर अज्ञात स्थान पर भेजा

कैथल। पिछले 60 दिनों से कैथल में आंदोलनरत मारुति से निकाले गए कर्मचारियों को पुलिस ने रविवार शाम लाठीचार्ज करते हुए कुरुक्षेत्र रोड बाईपास चौक के पास से खदेड़ दिया। पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए पानी की बौछारें कीं और आंदोलनकारी महिलाओं एवं कर्मचारी नेताओं पर लाठियां बरसाईं। बाद में प्रमुख कर्मचारी नेताओं को गिरफ्तार करके अज्ञात स्थान की ओर ले गई। इससे पूर्व भी शनिवार आधी रात को लघु सचिवालय में धरना दे रहे कर्मचारियों को बल प्रयोग करते हुए खदेड़ दिया और करीब 50 से ज्यादा कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया। समाचार लिखे जाने तक पुलिस आवश्यक कार्रवाई में जुटी हुई थी। प्रशासन की ओर से धारा 144 लागू किए जाने बावजूद कर्मचारियों और पुलिस में लुका-छिपी का खेल चलता रहा। रविवार सुबह लघु सचिवालय, करनाल रोड सहित शहर में प्रवेश मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात था। धारा 144 लगे होने के बावजूद प्रशासन बेबस नजर आया।
प्रशासन की सारी रणनीति को फेल करते हुए कर्मचारी गांव प्यौदा में एकत्रित हुए। इस दौरान पुलिस-प्रशासन कर्मचारियों की टोह लेता हुआ दिखाई दिया। करीब एकबजे 60 से 70 गाड़ियों में प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने करीब एक हजार से अधिक कर्मचारी गांव प्यौदा से शहर की ओर कूच किया। वहां ढयोडखेड़ी मार्ग से जींद रोड बाईपास पर पहुंचे। इसके बाद गाड़ियाें से उतर कर पैदल ही राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 65 की ओर कूच कर दिया। कर्मचारियों ने इस दौरान जमकर प्रदर्शन किया।
विभिन्न संगठन सदस्य अपने परिजनों के साथ, जिसमें महिलाएं और युवतियां भी शामिल थीं, प्रदर्शन करते हुए करनाल रोड बाईपास चौक को क्रॉस करते हुए ढांड रोड बाईपास चौक पहुंचे। जहां करीब दो बजे कुरुक्षेत्र मार्ग पुलिस बल ने बेरिकेड से उन्हें राक लिया। करीब चार घंटे तक एक तरफ कर्मचारी तो दूसरी ओर पुलिस डटी रही।
लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। पुलिस का नेतृत्व एसडीएम नर सिंह बांगड़, ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार जयभगवान शर्मा, डीडीपीओ राजेश खौथ, पुलिस उपाधीक्षक सुरेंद्र भौरिया कर रहे थे।
लोगों ने पुलिस पर किया पथराव
करीब छह बजे तक कर्मचारियों और अधिकारियों में कई दौर की बातचीत हुई। इसमें कर्मचारी शनिवार रात हिरासत में लिए गए कर्मचारियों को छोड़ने की जिद पर अड़े रहे। कर्मचारियों की ओर से बेरिकेड हटाने का प्रयास करते ही पुलिस ने लाठीचार्ज करते हुए कर्मचारियों को खदेड़ दिया। इस दौरान पत्थर लगने से फायर ब्रिगेड की गाड़ी का शीशा टूट गया। कई कर्मचारियों पर जमकर लाठियां बरसाईं। पुलिस ने कामरेड प्रेमचंद, शकुंतला, रामनिवास सहित कर्मचारी नेताओं को हिरासत में ले लिया। उन्हें अज्ञात स्थान पर ले गए। पुलिस ने आंसू गैस का एक गोला भी छोड़ा और कर्मचारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें कीं। पुलिस ने भागते हुए प्रदर्शनकारियोें को हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों की ओर से भी पुलिस पर पथराव किया गया।
कैथल में 60 दिनों से धरना दे रहे मारुति से निकाले गए कर्मचारियों ने रविवार को कैथल में लोकनिर्माण मंत्री रणदीप सुरजेवाला के आवास का घेराव करने का ऐलान किया था। इसके चलते प्रशासन की ओर से शनिवार शाम पांच बजे ही धारा 144 लागू कर दी थी। इसके बाद दूसरे जिलों से भारी पुलिस बुलाकर लघु सचिवालय में तैनात किया गया था।
•महिलाओं और कर्मचारी नेताओं को भी नहीं छोड़ा
•चार घंटे तक कैथल-कुरुक्षेत्र मार्ग पर जाम
•धारा 144 की धज्जियां उड़ीं, प्रशासन फेल
•रात को भी बारह बजे खदेड़ा लघु सचिवालय से
•आंदोलनकारी कर्मचारियों पर पानी की बौच्छार करते पुलिसकर्मी।

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